फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Logistics Cost: देश की लॉजिस्टिक्स लागत जीडीपी के आठ से नौ प्रतिशत के बीच, एनसीएईआर की रिपोर्ट में दावा

Thu, 14 Dec 2023 06:32 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

देश की राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के तहत रसद लागत को कम करने के लिए नए पर्यावरण अनुकूल जलमार्ग स्थापित किए जा रहे हैं, निर्यात की सुविधा के लिए एयर कार्गो टर्मिनल स्थापित किए गए हैं, कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं के साथ हवाई अड्डे और मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स सुविधाएं स्थापित की जा रही हैं। 
विज्ञापन
नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी। - फोटो : Freepik
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इकोनॉमिक पॉलिसी रिसर्च थिंक टैंक नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) की ओर से गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में कुल लॉजिस्टिक्स लागत देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद के 7.8-8.9 प्रतिशत के बीच है। केंद्र सरकार समग्र रसद लागत को कम करने और भारतीय उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए काम कर रही है।

विज्ञापन


सरकार 2030 तक भारत की बढ़ी हुई लॉजिस्टिक्स लागत को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के मौजूदा 13-14 प्रतिशत से घटाकर जीडीपी के 8-9 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (एनएलपी) जिसकी पिछले साल शुरुआत की गई थी का उद्देश्य अंतिम छोर तक त्वरित डिलीवरी हासिल करना, परिवहन से संबंधित चुनौतियों को समाप्त करना, निर्माताओं के लिए समय और धन की बचत करना और कृषि-उत्पादों की बर्बादी को रोकना है।

रसद लागत को कम करने के लिए, नए पर्यावरण अनुकूल जलमार्ग स्थापित किए जा रहे हैं, निर्यात की सुविधा के लिए एयर कार्गो टर्मिनल स्थापित किए गए हैं, कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं के साथ हवाई अड्डे और मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स सुविधाएं स्थापित की जा रही हैं। 
विज्ञापन


डीपीआईआईटी के सचिव राजेश कुमार सिंह ने रिपोर्ट जारी करने के बाद कहा, "भारत भौतिक और डिजिटल बुनियादी ढांचे दोनों में जिस तरह का निवेश कर रहा है। यह सब एक सक्षम वातावरण बना रहा है जहां हमें अच्छे और विश्वसनीय डेटा मिलना शुरू हो जाएगा, जिसके आधार पर, हम डेटा-आधारित योजना बना सकते हैं और अंततः डेटा-आधारित नीति-निर्माण भी कर सकते हैं।"

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के माध्यम से, एक ढांचा विकसित किया जा रहा है जिसका उपयोग विश्वसनीय रसद लागत अनुमानों की गणना करने के लिए किया जाएगा। सिंह ने कहा कि आंकड़ों की गणना सरकार की ओर से एनसीएईआर द्वारा की जाती है।

डीपीआईआईटी की विशेष सचिव सुमिता डावरा ने कहा कि विभाग विश्व बैंक के लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक (एलपीआई) में भारत की रैंकिंग में सुधार के लिए भी काम कर रहा है। एनसीएईआर की प्रोफेसर पूनम मुंजाल ने इस अवसर पर कहा कि ये त्वरित अनुमान हैं और आगे चलकर, अधिक बारीक डेटा का उपयोग करके इन संख्याओं को और परिष्कृत किया जाएगा। वर्तमान में, सरकार कुछ अनुमानों के अनुसार चल रही है, जिससे पता चलता है कि भारत की रसद लागत देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 13-14 प्रतिशत है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें