चालू वित्त वर्ष की पिछली दो तिमाहियों में तेज रफ्तार से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था की गति अक्तूबर-दिबंसर में सुस्त पड़ गई। राष्टट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, 2021-22 की तीसरी तिमाही में जीडीपी 5.4 फीसदी की दर से आगे बढ़ी। अप्रैल-जून यानी पहली तिमाही में कम आधार प्रभाव के कारण आर्थिक वृद्धि दर 20.3 फीसदी और जुलाई-सितंबर यानी दूसरी तिमाही में 8.5 फीसदी रही थी। इस तरह, पिछले दो तिमाहियों के मुकाबले तीसरी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर की रफ्तार धीमी रही।
औद्योगिकी श्रमिकों के लिए खुदरा महंगाई 5.84 फीसदी
कुछ खाद्य उत्पादों की कीमतें में तेजी से औद्योगिक श्रमिकों के लिए खुदरा महंगाई की दर जनवरी, 2022 में 5.84 फीसदी रही। पिछले साल जनवरी में खुदरा महंगाई 3.15 फीसदी और दिसंबर, 2021 में 5.56 फीसदी रही थी। श्रम मंत्रालय ने कहा कि आलोच्य महीने में खाद्य महंगाई 6.22 फीसदी रही, जो दिसंबर, 2021 में 5.93 फीसदी और पिछले साल जनवरी में 2.38 फीसदी रही थी। आंकड़ों के मुताबिक, आखिल भारतीय सीपीआई-आईडब्ल्यू (औद्योगिकी श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) जनवरी, 2022 में 0.3 अंक घटकर 125.1 अंक रहा। पिछले साल दिसंबर में यह 125.4 अंक था।
बजट में महामारी के बाद स्थिरता पर जोर : वित्तमंत्री
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि 2022-23 के बजट में महामारी के बाद सुधार के लिए स्थिरता पर जोर दिया गया है। पिछले साल के बजट की निरंतरता को कायम रखते हुए नया बजट पेश किया गया है। एक कार्यक्रम में विभिन्न उद्योगों एवं व्यापार संगठनों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि भविष्य को देखते हुए सरकार ने बजट में कृषि जैसे क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी अपनाने वाले कदम उठाए हैं।
इसके अलावा, इंडिया एट 100 पहल के तहत चिकित्सा और शिक्षा क्षेत्रों में डिजिटल कार्यक्रम चलाने पर भी जोर दिया गया है। सीतारमण ने कहा कि हम पिछले बजट से एक तरह की निरंतरता का भाव इस बजट में रखना चाहते थे। पिछला बजट फॉर्मूला बनाने और सिद्धांतों के निर्धारण में काफी व्यापक था। फिर महामारी से अर्थव्यवस्था के सुधार के लिए स्थिरता और सबसे बढ़कर अनुकूल कर प्रणाली देना इस बजट के निर्देशक सिद्धांत थे।