सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना की वजह से 2022-23 के दौरान चीन से लैपटॉप, पर्सनल कंप्यूटर, इंटीग्रेटेड सर्किट और सोलर सेल जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामानों के आयात में गिरावट आई है।
आर्थिक थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के आयात में गिरावट उन क्षेत्रों में उल्लेखनीय रूप से देखने को मिली है, जहां पीएलआई योजना शुरू की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2022-23 के दौरान भारत ने चीन से कुल 91 अरब डॉलर के उत्पादों का आयात किया। 2021-22 में यह आंकड़ा 94.6 अरब डॉलर रहा था। इस अवधि में चीन से चिकित्सा उपकरणों का आयात सालाना आधार पर 13.6 फीसदी घटकर 2.2 अरब डॉलर रह गया।
सोलर सेल के आयात में 70.9 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इस अवधि में 1.9 अरब डॉलर का सोलर सेल आयात किया गया। वहीं, लैपटॉप और पर्सनल कंप्यूटर का आयात 23.1 फीसदी की गिरावट के साथ 4.1 अरब डॉलर रह गया। मोबाइल फोन का आयात भी सालाना आधार पर 4.1 फीसदी घटकर 85.7 करोड़ डॉलर रह गया।
4.1अरब डॉलर के लैपटॉप-पीसी आयात हुए 2022-23 में
23.1फीसदी कम है 2021-22 के मुकाबले उर्वरक के आयात में भी गिरावट
पिछले वित्त वर्ष के दौरान चीन से खाद और अन्य उर्वरक के आयात में 26 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। इस अवधि में 2.3 अरब डॉलर के खाद और अन्य उर्वरकों का आयात किया गया। इंटीग्रेटेड सर्किट के आयात में भी 4.5 फीसदी की गिरावट रही।
लिथियम-आयन बैटरी में 96 फीसदी उछाल : भारत ने 2022-23 के दौरान चीन से 2.2 अरब डॉलर के लिथियम-आयन बैटरी का आयात किया। यह 2021-22 के मुकाबले 96 फीसदी ज्यादा है। इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने से लिथियम-आयन बैटरी के आयात में और तेजी आ सकती है।
तीन आंकड़े बताते हैं गिरावट की कहानी...
रिपोर्ट में कहा गया है कि तीन आंकड़े इस बात के संकेत हैं कि चीन से भारत के आयात में गिरावट आई है।
चीन से इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का आयात 2022-23 में घटकर 27.6 अरब डॉलर रह गया। 2021-22 में यह आंकड़ा 30.3 अरब डॉलर रहा था।
चीन से गैस आयात की रफ्तार 2021-22 के 16.1 फीसदी से घटकर 4.2 फीसदी रह गई।
भारत के मर्चेंडाइज आयात में चीन की हिस्सेदारी 2022-23 में घटकर 13.8 फीसदी रह गई। 2017-18 में यह हिस्सेदारी 16.4 फीसदी रही थी। इसके बावजूद चीन भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।
सोने का आयात तीन माह में सबसे कम
देश में सोने का आयात अप्रैल में 45 फीसदी घटकर तीन महीने के निचले स्तर पर आ गया।
चमड़ा उद्योग के लिए भी पीएलआई संभव
सरकार चमड़ा उद्योग के समर्थन के लिए कई सारी पहल पर काम कर रही है। उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के एक अधिकारी ने बताया, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय उद्योग के विकास को बढ़ावा देने के लिए योजना बना रहा है।
इस योजना से सेक्टर को मजबूती मिलेगी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में यह सक्षम होगा।
डीपीआईआईटी के अतिरिक्त सचिव राजीव सिंह ठाकुर ने बताया कि सारी पहल अभी चर्चा के ही चरण में हैं। उत्पादन से जुड़ी योजना (पीएलआई) को लेकर कहा, यह सभी बातें शुरुआती चरण में हैं और इस पर बाद में ही कुछ फैसला हो सकता है। हम कुछ और पहल को लाने के लिए कोशिश कर रहे हैं जो हमारी योजना में हैं।
एमआईपी को कर सकते हैं लागू
ठाकुर के मुताबिक, इस उद्योग से जुड़े आयात पर भी हम निगरानी रख रहे हैं। साथ ही न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) को लागू करने पर भी विचार हो सकता है। जो भी सलाह है, उनको गंभीरता से लेने की जरूरत है। जितनी भी पहल इस उद्योग के लिए है उन सभी पर विचार किया जा रहा है।