प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के एक अध्ययन से पता चला है कि 1950 से 2015 के बीच भारत में बहुसंख्यक धर्म (हिंदुओं) की आबादी में 7.8% की तेज से गिरावट आई है, जबकि कई पड़ोसी देशों में बहुसंख्यक समुदाय की आबादी में वृद्धि हुई है।
पड़ोसी देशों से तुलना की जाए तो भारत में बहुसंख्यक आबादी का सिकुड़ना (7.8 फीसदी) म्यांमार में 10 फीसदी कमी के बाद दूसरी सबसे महत्वपूर्ण गिरावट है। भारत के साथ-साथ नेपाल में भी हिंदू आबादी में देश की कुल आबादी के 3.6% की गिरावट दर्ज की गई। पीएम के आर्थिक सलाहकार परिषद की ओर से तैयार की गई इस रिपोर्ट को मई 2024 में जारी किया गया। इसमें दुनिया के 167 देशों में आबादी में आए बदलाव से जुड़े ट्रेंड्स की चर्चा की गई है।
पाकिस्तान व बांग्लादेश जैसे निकटतम पड़ोसी देशों में जहां मुस्लिम बहुसंख्यक हैं, उनकी आबादी में हिस्सेदारी बढ़ी है। बांग्लादेश की आबादी में जहां बहुसंख्यक मुस्लिमों की हिस्सेदारी में 18% का उछाल आया है, वहीं पाकिस्तान में बहुसंख्यक 3.75% बढ़े हैं। आफगानिस्तान में भी बहुसंख्यक 0.29% बढ़े हैं। 1971 में बांग्लादेश बनने के बावजूद पाकिस्तान में बहुसंख्यक धार्मिक संप्रदाय-हनफी मुस्लिम की हिस्सेदारी में 3.75% की वृद्धि और कुल मुस्लिम आबादी की हिस्सेदारी में 10% की वृद्धि हुई है।
अध्ययन के लेखकों का कहना है कि भारत का प्रदर्शन बड़े वैश्विक रुझानों के अनुरूप है। लेखकों का कहना है, "कई हलकों में जारी शोर के विपरीत, आंकड़ों के सावधानीपूर्वक विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में अल्पसंख्यक न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि वास्तव में संपन्न हो रहे हैं।"