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BNSS: 'आर्थिक अपराध के लिए हिरासत में लिए गए लोगों को हथकड़ी नहीं लगानी चाहिए', संसदीय समिति ने की सिफारिश

Mon, 13 Nov 2023 03:20 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

BNSS: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसए-2023) विधेयक को 11 अगस्त को लोकसभा में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस-2023) और भारतीय सक्षम अधिनियम (बीएसए-2023) विधेयकों के साथ पेश किया गया था। तीनों प्रस्तावित कानून क्रमशः दंड प्रक्रिया संहिता अधिनियम, 1898, भारतीय दंड संहिता, 1860 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 को प्रतिस्थापित करना चाहते हैं।
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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता। - फोटो : pixa
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विस्तार
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संसद की एक समिति ने सिफारिश की है कि आर्थिक अपराधों के लिए हिरासत में लिए गए लोगों को हथकड़ी नहीं लगाई जानी चाहिए और उन्हें बलात्कार और हत्या जैसे जघन्य अपराधों के लिए गिरफ्तार लोगों के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए। भाजपा सांसद बृजलाल की अध्यक्षता वाली गृह मामलों पर संसद की स्थायी समिति ने गिरफ्तारी के पहले 15 दिनों के बाद आरोपी की पुलिस हिरासत के मुद्दे पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) में बदलाव की भी सिफारिश की।

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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसए-2023) विधेयक को 11 अगस्त को लोकसभा में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस-2023) और भारतीय सक्षम अधिनियम (बीएसए-2023) विधेयकों के साथ पेश किया गया था। तीनों प्रस्तावित कानून क्रमशः दंड प्रक्रिया संहिता अधिनियम, 1898, भारतीय दंड संहिता, 1860 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 को प्रतिस्थापित करना चाहते हैं।

संसदीय समिति ने कहा कि उसे लगता है कि बीएनएसएस के खंड 43(3) में उल्लिखित हथकड़ी का उपयोग जघन्य अपराधों के चुनिंदा लोगों तक सीमित है ताकि गंभीर अपराधों के आरोपी व्यक्तियों को भागने से रोका जा सके और गिरफ्तारी के दौरान पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। हालांकि, समिति का मानना है कि 'आर्थिक अपराधों' को इस श्रेणी में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि "आर्थिक अपराध" शब्द में अपराधों की एक विस्तृत शृंखला शामिल है- इनमें छोटे से लेकर गंभीर मामले तक शामिल हैं और इसलिए, यह इस श्रेणी के तहत आने वाले सभी मामलों में हथकड़ी लगाने के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता है। 
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समिति ने कहा, 'इसलिए समिति सिफारिश करती है कि खंड 43 (3) में उपयुक्त संशोधन किया जाए ताकि खंड से 'आर्थिक अपराध' शब्द को हटाया जा सके। संसदीय समिति की रिपोर्ट शुक्रवार को राज्यसभा को सौंपी गई।

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