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GST On Insurance: बीमा प्रीमियम पर जीएसटी शून्य, लेकिन सस्ती नहीं होगी पॉलिसी; 5% तक हो सकता है महंगा

सार

जीएसटी परिषद ने जीवन और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर टैक्स घटाकर शून्य कर दिया है, लेकिन इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) हटने से कंपनियां टैरिफ पांच प्रतिशत तक बढ़ा सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे बीमा प्रीमियम में 18% की पूरी राहत मिलना मुश्किल है और पॉलिसियों की लागत में अपेक्षित गिरावट नहीं होगी।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : FreePik
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विस्तार
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अगर आप सोच रहे हैं कि व्यकि्तगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर जीएसटी शून्य होने से  प्रीमियम में 18 फीसदी तक की कमी आएगी, तो शायद ऐसा संभव न हो। जीएसटी परिषद ने जीवन व स्वास्थ्य बीमा के प्रीमियम पर जीएसटी को 18 फीसदी से घटाकर शून्य कर दिया है। हालांकि, उद्योग विशेषज्ञ इसका उल्टा असर पड़ने की आशंका जता रहे हैं।

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विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम के बावजूद बीमा प्रीमियम में पूरी राहत मिलना मुश्किल होगा। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के अनुसार, परिषद ने व्यक्तिगत स्वास्थ्य व जीवन बीमा प्रीमियम को 18 फीसदी से हटाकर बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के साथ शून्य स्लैब में रखा है। आईटीसी के नुकसान की भरपाई के लिए कंपनियां टैरिफ पांच फीसदी तक बढ़ा सकती हैं।  इससे स्वास्थ्य व जीवन बीमा की लागत में उम्मीद के मुताबिक राहत नहीं मिलेगी।

आईटीसी यानी दोहरे कराधान को रोकना
इनपुट टैक्स क्रेडिट एक ऐसी व्यवस्था है, जो वस्तु एवं सेवा कर के तहत व्यवसायों को उनके द्वारा खरीदे गए माल या सेवाओं पर चुकाए गए कर को उनकी बिक्री पर लगने वाले जीएसटी के खिलाफ समायोजित करने की अनुमति देती है। इसका उद्देश्य दोहरे कराधान को रोकना और कर की लागत को कम करना है।
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इनपुट टैक्स क्रेडिट खत्म होने से कितना होगा नुकसान?
वर्तमान में बीमा कंपनियां डिस्ट्रीब्यूशन कमीशन, पुनर्बीमा, और प्रचार व अन्य परिचालन खर्चों पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाती हैं! जीएसटी हटने के बाद, पुनर्बीमा सेवाएं भी जीएसटी से मुक्त हो जाएंगी, पर अन्य सेवाओं पर कंपनियों को जीएसटी चुकाना होगा।

चूंकि व्यक्तिगत पॉलिसियां अब ‘जीएसटी मुक्त’ हैं और सरकार ने बीमा के लिए उल्टे कर ढांचे (आईडीएस) का लाभ अधिसूचित नहीं किया है, इसलिए कंपनियां इस लाभ का दावा नहीं कर पाएंगी। इसलिए कंपनियां अपने मार्जिन को स्थिर बनाए रखने के लिए टैरिफ में 3 से 5 फीसदी तक वृद्धि कर सकती हैं।
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ऐसे समझें पूरा गणित

22 सितंबर से बीमा पॉलिसियों पर जीएसटी पूरी तरह से हटा दिया जाएगा। अभी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर 18% जीएसटी है। जीएसटी हटने व 3 से 5 फीसदी टैरिफ वृद्धि से स्वास्थ्य बीमा की लागत में 12 से 15 फीसदी की कमी आएगी। इसका मतलब पॉलिसीधारकों को 18 फीसदी के बजाय केवल 12 या 15 फीसदी कटौती का लाभ ही मिलेगा।

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