घरेलू लेनदेन और आयात से प्राप्त राजस्व में वृद्धि के दम पर सकल जीएसटी संग्रह जून, 2025 में सालाना आधार पर 6.2 फीसदी बढ़कर 1,84,597 करोड़ रुपये पहुंच गया। इस वृद्धि के बावजूद जीएसटी संग्रह फरवरी, 2025 के बाद चार महीने में सबसे कम है। उस समय कर संग्रह 1,83,646 करोड़ रहा था। जून, 2024 में सरकार को जीएसटी के रूप में 1,73,813 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी।
मासिक आधार पर 8.18 फीसदी गिरावट
सरकार के मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर भले ही बढ़ा है, लेकिन मासिक आधार पर इसमें 8.18 फीसदी गिरावट रही। साथ ही, यह अप्रैल और मई में लगातार दो महीने तक दो लाख करोड़ रुपये से अधिक रहने के बाद नीचे आ गया। जीएसटी संग्रह अप्रैल में 2.37 लाख करोड़ के सार्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था, जबकि मई में 2.01 लाख करोड़ रुपये था।
उत्तर प्रदेश व पंजाब जैसे राज्यों में चार फीसदी तक गिरावट
आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, राजस्थान और तमिलनाडु जैसे राज्यों में जीएसटी संग्रह चार से आठ फीसदी बढ़ा है। वहीं, उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात जैसे राज्यों में संग्रह एक से चार फीसदी तक घटा है।
- बड़े राज्यों में हरियाणा, बिहार और झारखंड में जीएसटी संग्रह में 10 फीसदी से अधिक वृद्धि दर्ज की गई।
- फीसदी के हिसाब से मणिपुर में जीएसटी संग्रह सर्वाधिक 71 फीसदी बढ़ा है।
एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में 11.4 फीसदी अधिक
घरेलू लेनदेन से प्राप्त सकल राजस्व पिछले माह 4.6 फीसदी बढ़कर 1.38 लाख करोड़ पहुंच गया। आयात से 45,690 करोड़ का राजस्व हासिल हुआ, जो एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में 11.4 फीसदी अधिक है।
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कुल 1,84,597 करोड़ रुपये के कर संग्रह में केंद्रीय जीएसटी की हिस्सेदारी 34,558 करोड़ रही। राज्य जीएसटी का 43,268 करोड़ रुपये, एकीकृत जीएसटी का 93,280 करोड़ और उपकर का 13,491 करोड़ का योगदान रहा।