भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि देश की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार मजबूत बनी हुई है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी के आंकड़े सबको चौंका देंगे। दूसरी तिमाही में जीडीपी की वास्तविक वृद्धि दर 6.4 फीसदी रहने की उम्मीद है। दास ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में कहा, भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं इस समय वैश्विक वृद्धि के लिए सबसे बड़ा जोखिम हैं लेकिन, दूसरे देशों की तुलना में भारत इसे संभालने के लिए बेहतर स्थिति में है।
गवर्नर ने कहा, महंगाई हमारी पहली प्राथमिकता है। मौद्रिक नीति तैयार करते समय विकसित देशों में दरों और अन्य अंतरराष्ट्रीय कारकों को ध्यान में रखा जाता है। आखिर में मौद्रिक नीति महंगाई और वृद्धि के घरेलू कारकों से ही तय होती है। हमारी मौद्रिक नीति इस बात से प्रभावित नहीं होती है कि बॉन्ड पर रिटर्न (भारत और अमेरिका के बीच) में क्या अंतर है या मुद्रा का मूल्य गिर रहा है या नहीं। जेपी मॉर्गन वैश्विक बॉन्ड सूचकांकों में भारत को शामिल करने पर दास ने कहा, इसके साथ सकारात्मक और नकारात्मक दोनों बातें जुड़ी हुई हैं। वित्तीय बाजारों में किसी बड़ी अस्थिरता की आशंका नहीं है।
कुछ निजी बैंकों में नौकरी छोड़ने की दर 30 फीसदी से ज्यादा
दास ने कहा कि निजी क्षेत्र के कुछ बैंकों में कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर काफी अधिक है। कुछ प्रमुख बैंकों ने सूचित किया है कि उनके यहां नौकरी छोड़ने की दर 30 फीसदी से अधिक हो चुकी है। केंद्रीय बैंक नियामकीय निगरानी के तहत इस मुद्दे पर करीब से नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा, नौकरी बदलने के संबंध में युवाओं का नजरिया बदल रहा है। युवा इस पहलू पर अब अलग तरह से सोच रहे हैं। ऐसे मुद्दे से निपटने के लिए हर बैंक को एक प्रमुख दल का गठन करना होगा।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता वैश्विक विकास के लिए सबसे बड़ा जोखिम है। उन्होने कहा, "भारत संभावित जोखिम भरी स्थितियों से निपटने के लिए बेहतर स्थिति में है।" दास ने कहा कि भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनने के लिए तैयार है और हमारा लक्ष्य साल 2028 तक वैश्विक विकास में 18 प्रतिशत तक का योगदान देना है।