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Raghuram Rajan: 'आर्थिक वृद्धि से जुड़े हाइप पर विश्वास करना बड़ी भूल', पूर्व RBI गवर्नर ने दी ये चेतावनी

Wed, 27 Mar 2024 10:03 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Raghuram Rajan: भारत को 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षा को खारिज करते हुए राजन ने कहा कि इस लक्ष्य की बात करना 'बकवास' है। ऐसे में जबकि आपके कई बच्चों के पास हाई स्कूल की शिक्षा नहीं है' और ड्रॉप-आउट दर अधिक है।
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रघुराम राजन।
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विस्तार
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भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि भारत अपनी मजबूत आर्थिक वृद्धि को लेकर 'हाइप' पर विश्वास करके बड़ी भूल कर रहा है क्योंकि महत्वपूर्ण संरचनात्मक खामियां हैं जिन्हें ठीक करने की जरूरत है। राजन ने एक साक्षात्कार में कहा कि नई सरकार के लिए चुनावों के बाद जो सबसे बड़ी चुनौती होगी वह है कार्यबल की शिक्षा और कौशल में सुधार करना। 

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उन्होंने कहा, एक ऐसे भारत में जहां 1.4 बिलियन आबादी में से आधे से अधिक 30 वर्ष से कम आयु के हैं। कार्यबल की शिक्षा और कौशल को ठीक किए बिना, देश को अपनी युवा आबादी का लाभ उठाने में संघर्ष करना पड़ेगा। 

आर्थिक प्रचार पर विश्वास करना देश के लिए सबसे बड़ी गलती होगी: राजन

उन्होंने कहा, 'प्रचार पर विश्वास करना देश के लिए सबसे बड़ी गलती होगी। प्रचार वास्तविक हो यह सुनिश्चित करने के लिए हमें कई और वर्षों की कड़ी मेहनत करनी है। पूर्व आरबीआई गवर्नर ने कहा कि कुछ राजनेता चाहते हैं कि आप प्रचार पर विश्वास करें लेकिन भारत के लिए इस विश्वास के आगे झुकना एक गंभीर गलती होगी।

भारत को 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षा को खारिज करते हुए राजन ने कहा कि इस लक्ष्य की बात करना 'बकवास' है। ऐसे में जबकि आपके कई बच्चों के पास हाई स्कूल की शिक्षा नहीं है' और ड्रॉप-आउट दर अधिक है।

राजन बोले- बढ़ता हुआ कार्यबल तभी लाभप्रद जब वे अच्छी नौकरियों में कार्यरत हों

राजन ने कहा, "हमारे पास एक बढ़ता हुआ कार्यबल है, लेकिन वह केवल तभी लाभप्रद हो सकता है जब वे अच्छी नौकरियों में कार्यरत हों।" उन्होंने कहा कि सबसे पहले भारत को अपने श्रमबल को रोजगार के काबिल बनाने की जरूरत है, और दूसरा अपने कार्यबल के लिए रोजगार पैदा करना है।

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राजन ने उन अध्ययनों का हवाला दिया जो दिखाते हैं कि महामारी के बाद भारतीय स्कूली बच्चों की सीखने की क्षमता में 2012 से पहले के स्तर तक गिरावट आई है और ग्रेड तीन के केवल 20.5% छात्र ही ग्रेड दो का पाठ पढ़ सकते हैं। भारत में साक्षरता दर वियतनाम जैसे अन्य एशियाई साथियों से भी नीचे है।

भारत को 8% की आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने के लिए और काम करने की जरूरत

उन्होंने कहा, "यह उस तरह की संख्या है जिससे हमें चिंतित होना चाहिए। मानव पूंजी की कमी दशकों तक हमारे साथ रहेगी।" राजन ने अर्थव्यवस्था की संभावनाओं के बारे में हाल में जताई गई उम्मीदों पर आशंका जताते  हुए कहा कि भारत को 8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने के लिए और काम करने की जरूरत है।

विदेशी निवेशक तेजी से विस्तार का लाभ उठाने के लिए भारत आ रहे हैं, जो सरकार का अनुमान है कि आने वाले वित्तीय वर्ष में 7% से अधिक तक पहुंच जाएगा, जिससे यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बन जाएगी।

राजन ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा उच्च शिक्षा के लिए वार्षिक बजट की तुलना में चिप विनिर्माण के लिए सब्सिडी पर अधिक खर्च करने का नीतिगत विकल्प गुमराह करने वाला है। भारत में परिचालन स्थापित करने के लिए सेमीकंडक्टर व्यवसायों को अनुमानित रूप से 760 अरब रुपये (9.1 बिलियन डॉलर) सब्सिडी के रूप में दिया जाना है जबकि उच्च शिक्षा के लिए महज 476 अरब रुपये का आवंटन किया गया है।

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