फार्मा, व्हाइट गुड्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे 14 क्षेत्रों के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं के तहत नवंबर 2023 तक 746 आवेदनों को मंजूरी दी गई है। भारत की विनिर्माण क्षमताओं और निर्यात को बढ़ाने के लिए 1.97 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ 14 क्षेत्रों के लिए योजनाओं की घोषणा की गई थी।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने कहा कि लाभार्थी कंपनियों ने 150 से अधिक जिलों (24 राज्यों) में इकाइयां स्थापित की हैं और सितंबर तक 95,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ जिससे 7.80 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन/बिक्री और 6.4 लाख से अधिक का रोजगार सृजन हुआ है।
मंत्रालय के बयान के अनुसार, ''नवंबर 2023 तक 746 आवेदनों को मंजूरी दी गई है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में लगभग 2,900 करोड़ रुपये प्रोत्साहन के लिए वितरित किए गए हैं। तीन साल की अवधि के भीतर मोबाइल विनिर्माण में 20 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।"
बयान के अनुसार 2022-23 में कुल 101 अरब डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में स्मार्टफोन का योगदान 44 अरब डॉलर रहा, जिसमें 11.1 अरब डॉलर का निर्यात भी शामिल है। मंत्रालय ने कहा, ''दूरसंचार क्षेत्र के आयात में 60 प्रतिशत की कमी आई और भारत एंटीना, जीपीओएन (गीगाबिट पैसिव ऑप्टिकल नेटवर्क) और सीपीई (ग्राहक परिसर उपकरण) में लगभग आत्मनिर्भर हो गया है। फार्मा क्षेत्र में भी कच्चे माल के आयात में उल्लेखनीय कमी आई है।
बयान में कहा गया है, 'पेनिसिलिन-जी सहित भारत में अन्य कई सामग्रियों और थोक दवाओं का निर्माण किया जा रहा है और सीटी स्कैन, एमआरआई जैसे चिकित्सा उपकरणों के निर्माण में तकनीक का हस्तांतरण हुआ है।"
व्हाइट गुड्स (एसी और एलईडी लाइट कंपोनेंट्स) में पीएलआई के बारे में कहा गया है कि स्कीम के तहत 64 कंपनियों को चुना गया है। इसमें से 34 कंपनियां एयर कंडीशनर कंपोनेंट्स के लिए 5,429 करोड़ रुपये और 30 कंपनियां एलईडी कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग के लिए 1,337 करोड़ रुपये का निवेश करेंगी।
मंत्रालय ने कहा, "6,766 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश से करीब 48,000 लोगों को अतिरिक्त प्रत्यक्ष रोजगार मिलने का अनुमान लगाया है।' मंत्रालय ने कहा कि इस योजना के तहत 13 विदेशी कंपनियां 2,090 करोड़ रुपये का निवेश कर रही हैं।"