वस्तु एवं सेवा कर ( GST ) को लॉन्च हुए दो साल हो गए हैं। ऐसे में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इसकी सबसे बड़ी समीक्षा शुरू कर दी है। समीक्षा के तहत सरकार फिर से जीएसटी की स्लैब और दरें तय तक सकती है। जीएसटी कलेक्शन बढ़ाने के लिए और लीकेज को रोकने के लिए सरकार ने इसकी समीक्षा शुरू की है।
जीएसटी की समीक्षा का काम केंद्र और राज्य सरकारों के 12 अधिकारियों की एक कमिटी को सौंपा गया है। बता दें कि शुक्रवार को राज्य के सचिवों पर जीएसटी को लेकर बातचीत प्रस्तावित है। मीटिंग के दौरान राज्यों से जीएसटी कलेक्शन बढ़ाने के लिए कहा जा सकता है।
समीक्षा के लिए जिस पैनल का गठन किया गया है, उसका काम जीएसटी में धोखाधड़ी को रोकने का भी होगा। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, सरकार ऐसे नियम बना सकती है जिससे लोग खुद ही जीएसटी के दायरे में जुड़ना चाहें। इसके अतिरिक्त जीएसटी रिव्यू कमिटी सरकार को कुछ उत्पादों को जीएसटी स्लैब में लाने पर विचार करने को कह सकती है।
बता दें कि पिछले कुछ महीनों से जीएसटी कलेक्शन में कमी आई है। मौजूदा वित्त वर्ष की पहले छमाही में जीएसटी कलेक्शन की ग्रोथ पांच फीसदी कम हुई है। इसका लक्ष्य 13 फीसदी से ज्यादा का था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कमी ऑटो सेक्टर में छाई मंदी, बाढ़ और स्लोडाउन के चलते आई है। सालाना 14 फीसदी से कम इजाफे की स्थिति में केंद्र सरकार ने राज्यों को भरपाई की बात कही है। मामले में विपक्षी सरकारों ने कहा है कि जीएसटी व्यवस्था में कमी की वजह से कलेक्शन में कमी आई है।