सर्वेक्षण के मुताबिक, प्रबंधन शिक्षा में निजी प्रबंधन कॉलेजों के छात्रों की तुलना में भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) जैसे सरकारी संस्थानों के छात्रों को कई गुना ज्यादा सालाना पैकेज मिलता है। शीर्ष आईआईएम के छात्रों को सालाना 20.6 लाख रुपये का उच्चतम औसत वेतन पैकेज मिला, जबकि नए आईआईएम को सालाना 13 लाख रुपये का औसत पैकेज मिला है। वहीं, कुछ शीर्ष निजी प्रबंधन स्कूलों में आईआईएम के करीब 19.6 लाख रुपये के पैकेज की पेशकश की गई।
नियोक्ता शीर्ष आईआईएम और कुछ शीर्ष सरकारी कॉलेजों से अपने मुख्य अधिकारियों का चयन करते हैं, जिनका पैकेज औसत संस्थानों से स्नातक करने वालों से 118 फीसदी ज्यादा रहता है।
सीएस, आईटी के छात्रों को शानदार पैकेज
इंजीनियरिंग की विभिन्न शाखाओं में कंप्यूटर साइंस (सीएस) या सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के छात्रों का औसत सालाना पैकेज 6.9 लाख रुपये रहता है, जबकि सिविल इंजीनियरिंग स्नातक को 3.3 लाख रुपये सालाना वेतन मिलता है। इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में 4 लाख रुपये तक का सालाना पैकेज मिल रहा है।
हालांकि सरकारी संस्थानों के सीएस, आईटी स्नातकों का औसत वेतन 48 फीसदी अधिक है। शीर्ष आईआईटी से निकलने वाले सीएस तथा आईटी के छात्रों को एडोब, अमेजॉन, गूगल, सैमसंग और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां हर साल बेहतर पैकेज देती हैं। इसमें मशीन लर्निंग और डाटा साइंस के स्नातकों को सबसे बेहतर पैकेज मिलता है।
वेतन में क्षेत्रीय विविधता का भी असर
सर्वेक्षण में आईआईएम से निकलने वाले स्नातकों के वेतन पैकेज में क्षेत्रीय विविधता भी स्पष्ट थी। उत्तर भारत के कॉलेजों में छात्रों को मिलने वाला औसत वेतन 15 फीसदी अधिक रहा, जबकि इनकी तुलना में पश्चिम भारत के कॉलेजों में 19 फीसदी कम रहा।