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योजना: सरकार का जलवायु रोधी किस्मों की खेती का लक्ष्य, अब होगी गर्मी झेल सकने वाले गेहूं की फसल

Wed, 27 Sep 2023 06:11 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

अल नीनो जैसे हालात के बीच सरकार ने अगले महीने से शुरू होने वाले रबी सत्र में गेहूं की बुवाई के कुल रकबे के 60 फीसदी हिस्से में जलवायु प्रतिरोधी किस्मों की खेती करने का लक्ष्य रखा है। देश में गेहूं की पैदावार का कुल रकबा 3 करोड़ हेक्टेयर है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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अल नीनो जैसे हालात के बीच सरकार ने अगले महीने से शुरू होने वाले रबी सत्र में गेहूं की बुवाई के कुल रकबे के 60 फीसदी हिस्से में जलवायु प्रतिरोधी किस्मों की खेती करने का लक्ष्य रखा है। देश में गेहूं की पैदावार का कुल रकबा 3 करोड़ हेक्टेयर है।

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केंद्रीय कृषि सचिव मनोज आहूजा ने रबी फसलों की बुवाई की रणनीति तैयार करने के लिए आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में मंगलवार को कहा, जलवायु पारिस्थितिकी में कुछ बदलाव हुए हैं और यह कृषि को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में हमारी रणनीति जलवायु प्रतिरोधी बीजों के इस्तेमाल की है। इसलिए, सरकार ने इस साल गर्मी झेल सकने वाली गेहूं की किस्मों की उपज वाले रकबे का दायरा बढ़ाकर 60 फीसदी करने का लक्ष्य रखा है।

सरकार ने 2021 में जल्द गर्मी आने से गेहूं की पैदावार पर पड़े असर को देखते हुए 2022 में किसानों को 47 फीसदी रकबे में गर्मी झेलने वाली किस्में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया था। गेहूं की बुवाई अक्तूबर में शुरू होती है।
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बदल रहा है बारिश का तरीका, योजना बनाएं राज्य
आहूजा ने कहा, बारिश का तरीका बदल रहा है। जून में कम बारिश, जुलाई में अधिक बारिश, अगस्त में सूखा व सितंबर में फिर अधिक बारिश हुई है। इससे देश में बारिश 5% कम हुई है। 10 साल के औसत की तुलना में बिहार, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, यूपी, प. बंगाल, केरल में जलाशयों में पानी की भारी कमी है। राज्य सरकारों को जलाशयों में पानी के स्तर और जमीनी संसाधनों को ध्यान में रखते हुए रबी सीजन के लिए योजना बनानी चाहिए। 

नैनो यूरिया और डीएपी उर्वरक हैं भविष्य
उर्वरक सचिव रजत कुमार मिश्रा ने कहा, पानी के बाद उर्वरक खेती में ऐसा कच्चा माल है, जो उत्पादन को प्रभावित करता है। नैनो यूरिया व डीएपी उर्वरक भविष्य बनने जा रहे हैं।

450 गांवों के लिए तैयार है आकस्मिक योजना
कृषि सचिव ने कहा, सरकार ने 450 गांवों के लिए आकस्मिक योजना बनाई है। कृषि मंत्रालय एक ढांचे पर काम कर रहा है, जो गांवों में लागू होगा। इसका मकसद किसानों को जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के बारे में बताने के साथ उससे निपटने के तरीके समझाना है।

देश में गर्मी झेलने वाली 800 से अधिक किस्में
कृषि सचिव ने कहा, देश में 800 से अधिक जलवायु प्रतिरोधी किस्में उपलब्ध हैं। इन बीजों को सीड रोलिंग योजना के तहत बीज शृंखला में डालने की जरूरत है। उन्होंने सभी राज्यों से कहा, वे किसानों को गर्मी प्रतिरोधी किस्में उगाने के लिए प्रेरित करें। साथ ही, विशिष्ट क्षेत्रों को चिह्नित करने और उगाई जा सकने वाली किस्मों का नक्शा तैयार करें।

उन्होंने राज्यों को जलवायु संबंधी बदलावों से निपटने के लिए तैयार रहने का आह्वान करते हुए कहा, अगर बारिश, तापमान और विविधता का तरीका बदलता रहा तो इसका असर कृषि पर भी पड़ेगा।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक हिमांशु पाठक ने कहा, संस्था ने 2,200 से अधिक किस्मों का विकास किया है। इनमें से 800 जलवायु परिवर्तन के अनुकूल हैं।

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