फिनटेक सेक्टर में नवाचार और विवेकपूर्ण विनियमन के बीच संतुलन हासिल करने के लिए सेल्फ रेगुलशन लाने की जरूरत है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के दौरान यह बात कही। कार्यक्रम के दौरान आरबीआई गवर्नर ने कहा कि भारत के फिनटेक क्षेत्र ने पिछले दो वर्षों में लगभग 6 बिलियन डॉलर आकर्षित किए हैं।
दास ने कहा कि JAM (जनधन, आधार और मोबाइल), UPI(यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस), ULI (यूनिफाइड लैंडिंग इंटरफेस) की नई तिकड़ी भारत की डिजिटल अवसंरचना की यात्रा में क्रांतिकारी साबित होगी। खुदरा भुगतान क्षेत्र में यूपीआई की क्रांतिकारी सफलता के बाद दास ने इस सप्ताह देश के ऋण पारिस्थितिकी तंत्र को बदलने के लिए 'उचित समय पर' यूएलआई की लॉन्चिंग का एलान किया था।
यूपीआई, रूपे को सही मायने में वैश्विक बनाने के प्रयास जारीः आरबीआई गवर्नर
आरबीआई गवर्नर ने कहा, "हम अब UPI और RuPay को वास्तव में वैश्विक बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।" दास ने कहा कि भविष्य में सीमा पार भुगतान प्रणाली सहित वित्तीय अवसंरचना का विस्तार करने पर आरबीआई फोकस करेगा। दास ने कहा कि इस दिशा में भूटान, नेपाल, श्रीलंका, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), मॉरीशस, नामीबिया, पेरू, फ्रांस और कुछ अन्य देशों के साथ यूपीआई नेटवर्क के जरिये रुपे कार्ड और भुगतान स्वीकार करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
उन्होंने कहा कि ये प्रयास दुनियाभर में भारत की पहल को अपनाने के लिए सहयोगी प्रयासों को रेखांकित करते हैं। एकीकृत भुगतान प्रणाली यूपीआई मोबाइल फोन के जरिये अंतर-बैंक लेनदेन की सुविधा देती है जबकि रुपे घरेलू रूप से विकसित एक वैश्विक कार्ड भुगतान नेटवर्क है। दास ने कहा कि भारत अपनी प्रौद्योगिकी प्रतिभा और विकसित वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) पारिस्थितिकी के सहारे डिजिटल नवाचार और फिनटेक स्टार्टअप का वैश्विक केंद्र बनने, रणनीतिक साझेदारी बनाने और उसे मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय सहयोग की प्रतिबद्धता को सशक्त करने और उत्कृष्ट संस्थानों को विकसित करने की क्षमता रखता है।
दास ने कहा कि फिनटेक क्षेत्र ने पिछले दो वर्षों में लगभग छह अरब डॉलर का निवेश आकर्षित किया है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि भारत अब एक तेजी से बढ़ती आर्थिक शक्ति है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में पैदा हो रहे नए अवसरों का लाभ उठाने और जोखिमों को कम करने के लिए वित्तीय संस्थानों और फिनटेक को तेजी से एक मजबूत ढांचा अपनाना चाहिए।
पांचवें जीएफएफ 2024 का आयोजन हो रहा मुंबई में
पांचवें ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (जीएफएफ) 2024 का आयोजन मुंबई में किया जा रहा है। जिसमें दुनिया भर की फिनटेक कंपनियां हिस्सा ले रही हैं। जीएफएफ के पांचवें संस्करण में फिनटेक की परिवर्तकारी भूमिका पर ध्यान केंद्रीत किया जाएगा। ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में "बिल्डिंग ब्रिजेज फॉर दी नेक्स्ट डिकेड ऑफ फाइनेंस" नाम से रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट के अनुसार 2024 की दूसरी तिमाही में ग्लोबल फिनटेक क्षेत्र की फंडिंग 7-10 बिलियन डॉलर पर स्थिर है। नए उत्पादों और इनोवेशन के साथ ग्लोबल फिनटेक का राजस्व 2030 तक 25 प्रतिशत वृद्धि के साथ 1.5 ट्रिलियन डॉलर पहुंचने की उम्मीद है, यह 2023 में 320 अरब डॉलर रहा था।
फिनटेक कंपनियों व यूनिकॉर्न के मामले में भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर
भारत के फिनटेक क्षेत्र पर नजर डाले तो रिपोर्ट में भारत फिनटेक कंपनियों और यूनिकॉर्न की संख्या की दृष्टि से तीसरा स्थान रखता है। भारतीय फिनटेक कंपनियों की 2023 में डेढ़ गुना वृद्धि हुई। रिपोर्ट में 2030 तक भारतीय फिनटेक कंपनियों का राजस्व 35 से 40 प्रतिशत बढ़कर (डीपीआई एक्सपोर्ट के साथ) 50-60 बिलियन डॉलर होने का अनुमान जताया गया है। फिनटेक में निवेशक को लेकर भी बदलाव इस रिपोर्ट में देखने को मिला है। बीटूबी यानी बिजनेस टू बिजनेस क्षेत्र के निवेश में 6 प्रतिशत की वृद्धि रही और यह 2023-24 में 65 प्रतिशत बढ़ा है। ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के दौरान भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के सचिव (आर्थिक संबंध) दम्मू रवि, जीएफएफ 2024 के अध्यक्ष, इंफोसिस के सह-संस्थापक और एक्सिलर वेंचर्स के अध्यक्ष क्रिस गोपालकृष्णन और एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनआईपीएल) के सीईओ रितेश शुक्ला भी मौजूद रहे।
भारत में साइबर हमले अधिक, इस पर ध्यान देने की जरूरत
रिपोर्ट में भारत के लिए एक चिंताजनक बात सामने आई है, जिसमें भारत दूसरा ऐसा देश है जहां साइबर अटैक यानी साइबर हमले अधिक होते हैं। देश जिस तेजी डिजिटल क्रांती की ओर बढ़ रहा है, उसमें साइबर सुरक्षा पर अधिक ध्यान देने की बात कही गई है। इसमें सरकार द्वारा बनाई जाने वाली पॉलिसियों से लेकर फिनटेक कंपनियों द्वारा साइबर सुरक्षा पर निवेश और ध्यान दोनों देने की जरूरत इस रिपोर्ट में बताई गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह लोगों में डिजिटल साक्षरता नहीं होना है। हाल ही में यूपीआई पर साइबर हमला किया गया। जिसमें छोटे बैंकों सहित सामान्य लेने देन पर बुरी तरह प्रभावित हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक और बाजार नियामक सेबी ने भी साइबर सुरक्षा पर ध्यान देने को कहा है।
आम लोगों को डिजिटल साक्षरता बढ़ाने पर जोर
सम्मेलन में विदेश मंत्रालय के सचिव (आर्थिक संबंध) दम्मू रवि ने संबोधित करते हुए कहा कि मैं मानता हूं कि फिनटेक कंपनियों और सरकारी पॉलिसी के बीच काफी अंतर है, हमें इस अंतर को भरना होगा। आनेवाले समय भारत के लिए महत्वपूर्ण होगा क्योंकि हम इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत आईटी क्षेत्र की अगुवाई कर रहा है और आनेवाला समय डेटाक्रांती को होगा। जिसका लाभ हमें उठाना होगा। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि जिस तेजी से देश में डिजिटलाइजेशन बढ़ रहा है, लेकिन उस तेजी से डिजिटल साक्षरता नहीं बढ़ी है। इसलिए हमें इस ओर ध्यान देना होगा। सरकार और फिनटेक कंपनियों को देश में इस गेप को भरने की जरूरत है। भारत ने पिछले कुछ सालों में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी से बदलाव आया है। जिसमें यूपीआई ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई है। यह किफायती और आसानी से पेमेंट करने वाला प्लेटफॉर्म बना है। आने वाले समय डिजिटल करंसी और क्रेडिट तेजी से बढ़ेगा जो एमएसएमई में नई नौकरियों का सृजन भी करेगा।