अदाणी ग्रुप के मुखिया गौतम अदाणी को इस लिस्ट में पिछले वर्ष जून में अपने 60वें जन्मदिन के मौके पर 60,000 करोड़ रुपये का दान करने के बाद जगह मिली है। इतनी बड़ी राशि परोपकार के लिए खर्च करने की घोषणा कर वे भारत के सबसे बड़े दानवीर बन गए। यह राशि स्वास्थ्य, शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट पर खर्च होनी है। इस राशि को अदाणी परिवार के फाउंडेशन की ओर से खर्च की जाएगी, जिसकी स्थापना वर्ष 1996 में की गई थी।
गुजरात का मुंद्रा पोर्ट।
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60 वर्षीय गौतम अदाणी अदाणी ग्रुप के संस्थापक हैं। यह ग्रुप भारत का सबसे बड़ा पोर्ट ऑपरेटर है। यह ग्रुप आधारभूत संरचना, उपभोक्ता वस्तुओं, बिजली उत्पादन व संचरण व रियल एस्टेट के कारोबार से जुड़ा है। गौतम अदाणी की संपत्ति में वर्ष 2022 में बड़ा इजाफा हुआ है। वे कुछ समय के लिए दुनिया के दूसरे सबसे धनवान उद्योगपति भी रहे।
इस लिस्ट में दूसरा भारतीय नाम शिव नादर का है। पिछले कुछ दशकों के दौरान शिव नादर फाउंडेशन के माध्यम से वे अपनी संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा परोपकारी कार्यों पर खर्च कर चुके हैं। इस वर्ष भी वे करीब 11,600 करोड़ रुपये शिव नादर फाउंडेशन को दान कर चुके हैं, जिसकी स्थापना उन्होंने 1994 में की थी। इसका उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से लोगों को सशक्त करते हुए एक न्यायसंगत और योग्यता आधारित समाज बनाना था
एचसीएल के चेयरमेन शिव नादर (फाइल फोटो)
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'शिव नादर, एचसीएल टेक्नोलॉजीज के सह-संस्थापक हैं पर उन्होंने आईटी कंपनी के सभी पदों से वर्ष 2021 में इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने शिवनादर फाउंडेशन के माध्यम से कला और संस्कृति को बढ़ावा देने वाले शिक्षण संस्थानों जिनमें स्कूल व विश्वविद्यालय शामिल हैं स्थापित करने में मदद की है। इस फाउंडेशन के दूसरे ट्रस्टियों में उनकी पत्नी किरण नादर, बेटी रोशनी नादर और दामाद शिखर मल्होत्रा का नाम है।
फोर्ब्स के परोपकारियों की लिस्ट में तीसरे भारतीय का नाम है अशोक सूटा। उन्होंने इस वर्ष 600 करोड़ रुपये का दान किया है। यह राशि उन्होंने अप्रैल 2021 में स्थापित मेडिकल रिसर्ज ट्रस्ट के माध्यम से खर्च करने की बात कही थी। इस राशि को बढ़ती उम्र और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से संबंधित अध्ययन पर खर्च करने की बात कही गई थी। उन्होंने एसकेएन (SKAN- Scientific Knowledge for Ageing and Neurological Ailments) की स्थापना 200 करोड़ रुपये के दान के साथ की थी, आगे चलकर इस राशि को तीन गुना कर दिया गया।
फोर्ब्स की परोपकारियों की सूची।
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फोर्ब्स के अनुसार, इस गैर-रैंक वाली सूची में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के व्यक्तिगत रूप से परोपकार करने वाले लोगों को शामिल किया गया है। इसमें वे लोग शामिल हैं जो परोपकार के लिए अपनी कमायी हुई राशि से दान देने के साथ-साथ उसके क्रियान्वयन के लिए अपना समय और ध्यान दें रहे हैं। इस सूची में कंपनियों की ओर सीएसआर के तहत खर्च की जाने वाली राशि शामिल नहीं की गई है।