उन्होंने कहा कि अर्थशास्त्र में 'बुलहॉर्न' (मेगाफोन) के लिए कोई जगह नहीं है। चिदंबरम ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि राजग सरकार की ओर से राजकोषीय सुधार और 2023-24 में राजकोषीय घाटे के 5.8 फीसदी के बारे में बहुत कुछ कहा गया है। याददाश्त कमजोर है, इसलिए मैं विद्वान टिप्पणीकारों से प्रेरणा लेता हूं। सप्रंग के कार्यकाल में 2007-08 में राजकोषीय घाटा 25 फीसदी था। सप्रंग के अंतिम वर्ष (2013-14) में राजकोषीय घाटा 4.5 फीसदी था। राजग के अंतिम वर्ष (2023-24) में राजकोषीय घाटा 5.8 फीसदी है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि किसी भी सरकार में उतार-चढ़ाव आते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अगर राजग महामारी वर्ष (2020-21 और 2021-22) की ओर इशारा करता है, तो सप्रंग अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट (2008-09) और टेपर टैंट्रम (2013-14) के वर्षों की ओर इशारा करता है। कहानी की मूल बात यह है कि अर्थशास्त्र में 'बुलहॉर्न' के लिए कोई जगह नहीं है।
इससे पहले, गुरुवार को संसद में अंतरिम बजट पेश किया गया था। तब विपक्षी कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि अर्थव्यवस्था और सत्ता के लिए राजग का दृष्टिकोण अमीरों के पक्ष में है और बजट में न तो हर साल दो करोड़ नौकरियों के वादे के बारे में बाद की गई है और न ही महंगाई को कम करने या किसानों की आय दोगुनी करने के बारे में बात की गई है। चिदंबरम ने आरोप लगाया था कि यह अमीरों की, अमीरों के लिए सरकार है।