एनारॉक ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि जैसा अनुमान था, कोई बहुत बड़ी घोषणा नहीं की गई, लेकिन इसमें बुनियादी ढांचे के विकास व कनेक्टिविटी बढ़ाने पर पूरा जोर दिया गया है। आवास व बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़ी घोषणाओं से न केवल शीर्ष शहरों, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी रियल एस्टेट क्षेत्र को प्रत्यक्ष और परोक्ष फायदा ही मिलेगा।
पुरी कहा कि अगले पांच सालों में पीएम आवास योजना (ग्रामीण) के तहत दो करोड़ और घर बनाए जाने हैं, वहीं, मध्यम वर्ग के अपने घर का सपना साकार करने के लिए सरकार उनकी सहायता की योजना लाएगी। इससे खासकर झुग्गी-बस्तियों जैसा अतिक्रमण खत्म होने से उनके पुनर्विकास का रास्ता साफ होगा। इसी तरह, अवसंरचना विकास परिव्यय 11.1 फीसदी बढ़ाने की घोषणा की गई है और इस आवंटन का अधिकांश हिस्सा बुनियादी ढांचे को बढ़ाने और नई परियोजनाओं पर खर्च होगा। जाहिर है कि इससे रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए संभावनाएं बढ़ेंगी।
समग्र विकास के प्रति सरकार ने जताई प्रतिबद्धता
विशेषज्ञ आदित्य सिन्हा और आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष व सिन्हा रिसर्च में ओएसडी बिबेक देबरॉय ने कहा कि अंतरिम बजट मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियादी सिद्धांतों को बनाए रखने पर विशेष ध्यान देने के साथ दूरदर्शी दृष्टिकोण वाला है। सरकार का जोर सिर्फ आर्थिक मैट्रिक्स ही नहीं बल्कि समग्र विकास पर है। सरकार ने पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित प्रशासन अपनाया है। ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ यही है। विकास के मोर्चे पर सरकार ने अभूतपूर्व गति से भौतिक, डिजिटल और सामाजिक बुनियादी ढांचे के निर्माण में महत्वपूर्ण प्रगति की है। सरकार व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में कामयाब रही है। इसने औसत वास्तविक आय में उल्लेखनीय वृद्धि और मध्यम महंगाई के साथ बेहतर जीवन स्तर को सुनिश्चित किया है।
पिछले दशक में सरकार की आर्थिक प्रबंधन रणनीति ने समावेशी विकास को सुविधाजनक बनाया है। सक्रिय महंगाई प्रबंधन, वित्तीय क्षेत्र को मजबूत करना, बचत, कर्ज और निवेश की दक्षता बढ़ाना सरकार की प्रमुख पहलों में शामिल है। इसके अलावा जीआईएफटी, आईएफएससी और आईएफएससीए की स्थापना वैश्विक पूंजी और वित्तीय सेवा केंद्र बनने की भारत की महत्वाकांक्षा को रेखांकित करती है। पूंजीगत खर्च 11.1 लाख करोड़ रुपये होने से हरित हाइड्रोजन और जैव ईंधन सहित रेलवे, विमानन और ऊर्जा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास के माध्यम से आर्थिक विकास को बढ़ावा मिला है। आधुनिक बुनियादी ढांचे और सभी के लिए अपनी क्षमता तक पहुंचने के अवसरों के साथ एक समृद्ध राष्ट्र बनाने का लक्ष्य ‘विकसित भारत' के विजन में समाहित है।
विकसित भारत की झलक नजर आई, निजी निवेश पर सरकार का जोर
नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि संभवत: आजाद भारत का यह पहला बजट है, जिसमें चुनाव के करीब होने के बावजूद सरकार ने रेवड़ियां बांटने का सहारा नहीं लिया। अंतरिम बजट के जरिये सरकार ने विकसित भारत की झलक पेश करने की कोशिश की है। जिन चार स्तंभों महिला, किसान, युवा और गरीब की नींव पर सरकार की विकसित भारत को खड़ा करने की आकांक्षा है, उस पर अंतरिम बजट को फोकस किया गया है।
कुमार का कहना है कि अंतरिम बजट के आंकड़े बताते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था सही रास्ते पर है। वित्तीय घाटा 5.9 फीसदी से घट कर 5.8 फीसदी हो गया है। वित्त मंत्री ने कहा है कि इसे जल्द ही 5.7 प्रतिशत पर लाया जाएगा। वैश्विक अनिश्चिताओं के बीच भारत अब भी सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है। चंद सालों में हम दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर भी बढ़ रहे हैं। सवाल है कि इससे क्या होगा? इससे निजी निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। दुनिया में यह संदेश गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था न सिर्फ मजबूत है, बल्कि स्थिर भी है। जिस प्रकार मोदी सरकार ने लॉलीपॉप राजनीति से दूरी बनाई है, उससे विशेषज्ञ हैरान परेशान हैं। मेरी समझ में सरकार सत्ता बरकरार रखने के प्रति पूरी तरह आश्वस्त है। उसे पता है कि वह जो भी गैरजरूरी घोषणा करेगी, सरकार में बने रहने के कारण उसकी कीमत भी उसी को चुकानी होगी।
गरीब, महिला, युवा और अन्नदाता पर केंद्रित बजट
आर्थिक विशेषज्ञ, नारायण कृष्णमूर्ति का कहना है कि अंतरिम बजट सरकार के लिए संसद और राष्ट्र के सामने अपनी विभिन्न योजनाओं और पहलों की सफलता का विवरण देने का आखिरी मौका होता है। इस लिहाज से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कुछ साहसिक और महत्वाकांक्षी बयान दिए, जो इस बात की झलक देते हैं कि सरकार पिछले एक दशक में क्या करने में कामयाब रही है और भविष्य में क्या करने की योजना बना रही है।
उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में, बजट विषयों के इर्द-गिर्द घूमते रहे हैं और इस वर्ष जो थीम पेश की गई वह गरीब, महिलाएं, युवा और ‘अन्नदाता’ (किसान) पर केंद्रित है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि इन समूहों पर ध्यान केंद्रित करने से अर्थव्यवस्था के साथ-साथ देश के लोगों को भी बहुत लाभ होगा। यह राजकोषीय विवेक के दृढ़ पालन के साथ-साथ बुनियादी ढांचे के विकास के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता का प्रदर्शन था। यह निरंतर विकास का मार्ग प्रशस्त करता है और देश को 2047 तक एक विकसित अर्थव्यवस्था प्राप्त करने की दिशा में अग्रसर करता है।
लोकलुभावन नहीं, आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने पर जोर
कृष्णमूर्ति ने कहा कि यह कोई लोकलुभावन बजट नहीं है, बल्कि ऐसा बजट है, जिसमें सरकार ने कुछ समझदारी दिखाई है। आर्थिक विकास की गति को देखते हुए, व्यापक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने की आवश्यकता थी, जिसे राजकोषीय समेकन के लिए रास्ता देने के लिए विवेकपूर्ण ढंग से तैयार किया गया है। मामले में, राजकोषीय घाटे का संशोधित अनुमान सकल घरेलू उत्पाद का 5.8 फीसदी है, जो नाममात्र वृद्धि अनुमान में कमी के बावजूद बजट अनुमान में सुधार कर रहा है।
किसानों की आय में वृद्धि करने के लिए अभी और प्रयास करने की है जरूरत
कृषि विशेषज्ञ देवेंदर शर्मा ने बताया कि सरकार ने स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिलाओं के लिए लखपति दीदी की मुहिम को तेज करने के जो प्रयास किए हैं उनसे बड़ा बदलाव आएगा। इससे ग्रामीण महिलाएं आगे आएंगी और आत्मनिर्भर बनेंगी। आज आंध्र प्रदेश में जो ग्रामीण क्षेत्रों में क्रांति आई है, उसका कारण स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देना ही है। देश में ज्यादातर ऐसे समूह महिला केंद्रित हैं। वहीं, आंध्र प्रदेश ने एक नया काम शुरू किया। वहां पुरुषों के भी स्वयं सहायता समूह खड़े किए जा रहे हैं। अब लखपति दीदी ही नहीं, लखपति भाई बनाने की भी जरूरत है। इसके अलावा बजट में मत्स्य पालन पर अधिक ध्यान दिया गया है। इस क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं। पिछले साल भी सरकार ने मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया था। ग्रामीण क्षेत्रों में पीएम आवास योजना के तहत अगले पांच वर्षों में दो करोड़ और मकान बनाने के लक्ष्य से भी काफी बदलाव आएंगे। इस बार अपेक्षा थी कि पीएम किसान निधि की राशि सालाना 6,000 रुपये से बढ़ाकर कम से कम 12,000 रुपये दी जाएगी, जो नहीं हुआ।