साल 2013-14 के बजट में केंद्र सरकार ने तेल व उर्वरक सब्सिडी के 35 हजार करोड़ रुपये के भुगतान अनुचित ढंग से अगले वर्ष के लिए टाल दिए थे, ताकि उस वर्ष वित्तीय घाटा कम करके दिखा सकें। हालांकि इसका बड़ा नुकसान इन क्षेत्रों से जुड़ी कंपनियों को हुआ, उनकी वृद्धि पर बेहद बुरा असर पड़ा। सिविल सोसाइटी संगठन ब्लूक्राफ्ट के सीईओ अखिलेश मिश्रा ने ऐसे ही कुछ तथ्यों का विश्लेषण करते हुए 10 साल पहले के बजट की कमियों और मौजूदा बजट के प्रावधानों की तुलना की है। उन्होंने दावा किया कि मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी के नेतृत्व में यूपीए में 10 साल में हुए कामों के मुकाबले बीते 10 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आर्थिक प्रबंधन असाधारण रहा है।
बजट 2013-14...घाटे में करते थे बनावटी कमी
उस वर्ष योजनागत व्यय में 80 हजार करोड़ रुपये की कमी कर दी गई। इससे घाटा कम दिखाने में मदद मिली। लेकिन नुकसान यह हुआ कि उत्पादकता बढ़ाने वाले निवेश खत्म कर दिए गए। इसी तरह बुनियादी ढांचे के विकास कर रहीं कंपनियों व अन्य कुछ क्षेत्रों की कंपनियों के पूरे भुगतान ही रोक दिए गए। इससे प्रगति में ठहराव आया। अनुमान हैं कि जनवरी से मार्च 2014 के बीच सामान्यत: 85 हजार करोड़ रुपये खर्च होने चाहिए थे, खर्च हुए महज 8 हजार करोड़। साल 2005 से 2014 के बीच केंद्र सरकार का पूंजीगत निवेश 23 प्रतिशत से घट कर 14 प्रतिशत रह गया। यही वजह रही है कि इन वर्षों में नौकरियों में कमी आती गई, तेज वृद्धि दर को भी क्षति पहुंची।
और बजट 2024 : ऐसे ला रहे पारदर्शिता
सरकार ने सुनिश्चित किया कि हर भुगतान दर्ज किया जाए और बजट में पारदर्शिता रहे। इसके बावजूद घाटे में कमी की दर बनाए रखी गई है। पूंजीगत खर्च 2018 में 3 लाख करोड़ से कम था, 2024-25 के बजट अनुमान में 11 लाख करोड़ पार कर चुका है। जीडीपी वृद्धि भी तेज है, महंगाई दर नरम है, घाटा नियंत्रित है। इसका परिणाम है कि पिछले 10 साल में भारत न केवल तेजी से वृद्धि कर रहा है, बल्कि नौकरियां भी बढ़ी हैं। बेरोजगारी दर 2017 में 6.1 प्रतिशत के मुकाबले 2022-23 में 3.2 प्रतिशत पर है। चालू खाता घाटा लगातार गिर रहा है। खुद प्रधानमंत्री के शब्दों में कहें तो हम ‘स्वीट स्पॉट’ पर हैं, वे देश को विकसित भारत की राह पर आगे बढ़ा रहे हैं।
राजकोषीय लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता जताने वाला बजट : मूडीज
मूडीज इंवेस्टर सर्विस ने बजट की सराहना करते हुए कहा कि यह राजकोषीय घाटे को कम करने के लक्ष्यों के प्रति सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मूडीज के वरिष्ठ वाइस प्रेसिडेंट क्रिश्चियन डी गुजमैन ने कहा कि सरकार ने चुनावों से पहले बड़े पैमाने पर सहायता राशि का सहारा न लेकर या विवेकाधीन खर्च में वृद्धि न करके राजकोषीय संयम का प्रदर्शन किया।