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Union Budget 2023: मध्यम वर्ग को ‘बजट’ से बड़ी आस, आयकर का दायरा बढ़ाने पर क्या फैसला लेंगी वित्त मंत्री?

Tue, 24 Jan 2023 07:36 PM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Union Budget 2023: देश के आयकरदाताओं को 80सी के तहत विभिन्न खर्चों के एवज में टैक्स में छूट मिलती है। 80सी के तहत आने वाले खर्चों की लिस्ट पहले से बहुत लंबी है। ऐसे में देश का मध्यम वर्ग चाहता है कि इस लिस्ट से कम से कम बच्चों की ट्यूशन फी का खर्च हटा दिया जाए।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण। - फोटो : Twitter@IncomeTaxIndia
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विस्तार
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जैसे-जैसे बजट की तारीख करीब आ रही हैं अटकलों  का बाजार भी गर्म हो गया है। समाज का हर वर्ग अपने-अपने हिसाब से बजट से अपनी अपेक्षाओं को जोड़कर देख रहा है। देश के मध्यम वर्ग को इस बार के बजट से ढेर सारी उम्मीद हें।  आम तौर पर अर्थशास्त्री ढाई लाख प्रतिवर्ष से 20 लाख सालाना आमदनी वाले लोगों को मध्यम वर्ग के अंतर्गत मानते हैं। आइए जानते हैं इस बार देश का यह वर्ग वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से क्या चाहता है?

आयकर के स्लैब में हो बदलाव 

बीते कई वर्षों में आयकर के स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस बार के बजट में देश का मध्यम वर्ग इस बात की उम्मीद लगाए है कि वित्त मंत्री आयकर के दायरे में बदलाव की घोषणा करेंगी। सरकार वर्ष 2020 में इंडिविजुअल टेक्सपेयर्स के लिए न्यू टैक्स रिजाइम लेकर आई थी। जानकारों के मुताबिक करदाताओं को उससे कोई बड़ा फायदा नहीं हुआ। ऐसे में देश का एक बड़ा वर्ग लंबे समय से टैक्स स्लैब में बदलाव की मांग कर रहा है। देश में लगातार बढ़ती महंगाई को देखते हुए भी लोगों का मानना है कि सरकार को आयकर का दायर कम ही सही लेकिन बढ़ाना चाहिए।

बच्चाें की पढ़ाई का खर्च 80सी से बाहर हो 

देश के आयकरदाताओं को 80सी के तहत विभिन्न खर्चों के एवज में टैक्स में छूट मिलती है। 80सी के तहत आने वाले खर्चों की लिस्ट पहले से बहुत लंबी है। ऐसे में देश का मध्यम वर्ग चाहता है कि इस लिस्ट से कम से कम बच्चों की ट्यूशन फी का खर्च हटा दिया जाए। बैंकर आशुतोष रंजन का कहना है कि महंगाई के कारण घरों का खर्च पहले ही बढ़ा हुआ है। 80सी के तहत महज डेढ़ लाख तक की ही राशि पर छूट मिलती है। साल भर में बच्चों की पढ़ाई का खर्च ही उससे अधिक हो जाता है। ऐसे में इस बार के बजट में सरकार को ट्यूशन फी को 80सी से बाहर करने की घोषणा करनी चाहिए।

स्वास्थ्य बीमा योजना पर छूट बढ़ाने की अपेक्षा 

देश का मध्यम वर्ग इस बात की उम्मीद कर रहा है कि इस बार के बजट में सरकार स्वास्थ्य बीमा योजनाओं पर मिलने वाली टैक्स छूट में वृद्धि करने का फैसला लेगी। फिलहाल इस मद में 25000 रुपये तक की राशि पर छूट मिलती है। लोगों की अपेक्षा है कि कोविड के बाद बढ़ते मेडिकल एक्सपेंस को देखते हुए इसे बढ़ा कर 50 हजार रुपये तक किया जाए।

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आयुष्मान योजना का दायरा बढ़े तो मिलेगी बड़ी राहत

फिलहाल देश में एक खास आय वर्ग के लोगों को आयुष्मान योजना का लाभ मिलता है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार की ओर से पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है। देश के मध्यम वर्ग की अपेक्षा है कि इस बार इस योजना का दायरा बढ़ाया जाए क्योंकि मध्यम वर्ग में भी कई ऐसे परिवार हैं जिनकी आमदनी महज ढाई से पांच लाख रुपये सालाना है। वे निजी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं का भार उठाने में सक्षम नहीं है। ऐसे में उनके लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार को आयुष्मान योजना का दायरा बढ़ाने की घोषणा करनी चाहिए। 

रोजगार के अवसर बढ़ें, खाली पदों पर हो नियुक्ति  

कोरोना संकट के बाद देश में एक बड़ा वर्ग रोजगार की कमी की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में देश का मध्यम वर्ग चाहता है कि सरकार इस बार के बजट में कुछ ऐसी योजनाओं की घोषणा करें जिससे मध्यम वर्ग के परिवारों से आने वाले युवाओं को रोजगार के समुचित अवसर मिल सकें। इसके अलावे देश वर्तमान में विभिन्न सरकारी संस्थानों में खाली पड़े पदों पर नियुक्ति सुनिश्चित करने के प्रयास भी सरकार को करने चाहिए।

वित्त मंत्री के बयान से मध्यम वर्ग की जगी उम्मीद 

हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि वे स्वयं मध्यम वर्ग के परिवार से आती हैं इसलिए उनका दर्द समझती हैं। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने अपने पूरे कार्यकाल के दौरान मध्यम वर्ग पर किसी नए टैक्स का भार नहीं दिया है। पांच लाख तक की सालाना आमदनी वाले लोगों पर कोई टैक्स नहीं लगाया गया है। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा था कि मिडिल क्लास को बढ़िया पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन की जरूरत है, इसलिए हमने 27 शहरों तक मेट्रो का विस्तार किया है। मध्यम वर्ग के परिवारों को रोजगार के लिए शहरों का रुख करना पड़ा है ऐसे में हम स्मार्ट सिटी की परिकल्पना को साकार करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जहां रोजगार के साथ उनके लिए तमाम सुविधाएं मौजूद हों। बजट से ठीक पहले वित्त मंत्री के ऐसा बयान देने से जानकार उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार अपने बजट भाषण के दौरान वे इस वर्ग को खास सौगात देंगी।

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