अधिकतर जानकारों का मानना है कि इस बार के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आम आदमी को राहत देने वाले कुछ बड़े फैसलों को अमलीजामा पहना सकती हैं। इंस्टीच्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया की तरफ से सरकार को भेजी गई एक सिफारिश में कहा गया है कि पीपीएफ की सालाना लिमिट को 1.5 लाख से बढ़ाकर 3 लाख रुपये करने पर सरकार को विचार करना चाहिए। सिफारिश के अनुसार पीपीएफ में नौकरीपेशा, मध्यम वर्ग और व्यापारी ज्यादा पैसा लगाते हैं ऐसे में अगर इसकी लिमिट बढ़ायी जाती है तो समाज के एक बड़े वर्ग को फायदा होगा।
एक्सिस सिक्योरिटीज के एमडी और सीईओ बी. गोपकुमार ने 2023 के बजट से जुड़ी संभावनाओं पर कहा कि चूंकि यह वर्ष 2024 के आम चुनावों से पहले आखिरी पूर्ण बजट है ऐसे में इसके विकासोन्मुख होने की उम्मीद है। घर खरीदने पर मौजूदा आयकर लाभ का दायरा बढ़ाने की घोषणा होने से रियल एस्टेट क्षेत्र को बढ़ावा मिल सकता है। बजट में ग्रामीण खर्च और बुनियादी ढांचे के विकास को प्रोत्साहित करने के उपाय मुख्य आकर्षण होंगे। उनके अनुसार, उद्यमिता संस्कृति को बनाने और मजबूत करने के लिए कोई भी रोडमैप आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे सकता है। इससे रोजगार सृजन के मामले में भी बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है। कुल मिलाकर वृद्धि और विकास पर फोकस होने के साथ 2023-24 के बजट में समाज के सभी वर्ग के लिए कुछ न कुछ हो सकता है। एफएमसीजी, मैन्युफैक्चरिंग, एमएसएमई और बैंकिंग कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिनसे जुड़ी बड़ी घोषणाएं वित्त मंत्री कर सकती हैं।