देरी की स्थिति में समय की भरपाई के लिए अधिकतम अनुमति वाली गति से ट्रेन चलाने के लिए रेल मंत्रालय ने चालकों को कहा है। नए दिशानिर्देश साल 2000 में जारी एक आदेश का स्थान लेंगे, जिसमें कहा गया था कि समय पर होने के बावजूद ट्रेनों को अधिकतम अनुमति गति (एमपीएस) से चलाया जाएगा।
दरअसल ओवर स्पिडिंग की डर से लोको पायलट एमपीएस पर ट्रेन चलाने से बचते हैं और इसी वजह से रेलगाड़ियां लेट हो जाती हैं। गौरतलब है कि स्वीकृत गति से अधिक पर ट्रेन चलाने पर दंड का प्रावधान है।
यह था पहले नियम
मेल एवं एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए स्वीकृत गति सीमा 110 किमी प्रति घंटा है लेकिन वे औसतन 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं। राजधानी और शताब्दी जैसी ट्रेनों के लिए अधिकतम अनुमति गति सीमा 130 किमी प्रति घंटा है जबकि वे औसतन 80 से 90 किमी प्रति घंटे की गति से दौड़ती हैं। बता दें कि इस साल करीब 30 फीसदी ट्रेनें देरी से चल रही हैं।
यात्रियों को तब भी भुगतना होगा खामियाजा
हालांकि रेलवे के इस फैसले से यात्रियों को तब भी खामियाजा भुगतना पड़ेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि लंबी दूरी की जो ट्रेनें आएंगी या फिर जाएंगी वो भी लेट होंगी। शनिवार को जो ट्रेनें चलकर रविवार या फिर सोमवार को पहुंचती हैं वो भी रास्ते में लेट हो जाएंगी। इससे अगले दिनों में भी यह लेट हो सकती हैं। इसलिए हमारी राय है कि आप शनिवार से लेकर के सोमवार तक ट्रेन से सफर करने में थोड़ी सी सावधानी रखें।