सर्कस में प्रदर्शकारियों की सुरक्षा के लिए जैसे सेफ्टी नेट होता है, उसी प्रकार संकट मे हमारी-आपकी वित्तीय सुरक्षा के लिए आपात फंड जरूरी है। यह वित्तीय रणनीति का महत्वपूर्ण पहलू है, जिसकी उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए। इस फंड का उद्देश्य आपात समय में किराया देने, जरूरी सामान खरीदने, ईएमआई व बीमा प्रीमियम चुकाने जैसे जरूरी खर्चों को पूरा करना होता है। आदर्श रूप से, आपात फंड आपकी मासिक आय का तीन से छह गुना होना चाहिए। लेकिन, यह परिवार की जरूरतों के आधार पर अलग भी हो सकता है। आपात फंड बनाने से पहले अपने खर्चों और कर्जों का आकलन कर वह राशि तय करें, जिसकी आपको जरूरत पड़ सकती है।
यहां रख सकते हैं पैसा
- आपात फंड ऐसे साधनों में रखना चाहिए, जिनसे आसान निकासी संभव हो। ऐसे कई साधन हैं, जिनमें बचत खाता, लिक्विड फंड व एफडी शामिल हैं।
- बचत खाता : इससे तुरंत बिना किसी जुर्माने के निकासी कर सकते हैं।
- लिक्विड फंड्स : ये कम जोखिम वाले म्यूचुअल फंड्स होते हैं। इनकी मैच्योरिटी अवधि कम होती है और बचत खाते की तुलना में बेहतर रिटर्न मिलता है।
- स्वीप-इन एफडी : ये ऐसे एफडी होते हैं, जिनमें एक फिक्स्ड रकम से अधिक राशि बचत खाते से एफडी में ट्रांसफर की जाती है। इस पर बचत खाते से अधिक ब्याज भी मिलता है।
- आपात फंड के लिए पैसा अलग से रखने में संघर्ष करना पड़ रहा है तो तारीख तय कर उस राशि का ऑटोमैटिक फंड ट्रांसफर विकल्प चुन लें, जो आप डेबिट करना चाहते हैं।
रोजमर्रा के खर्चों के लिए न करें इस्तेमाल
आदिल शेट्टी, सीईओ बैंक बाजार डॉट कॉम का कहना है कि कोरोना महामारी के बाद से आपात फंड की महत्ता काफी बढ़ गई है। ध्यान रखें कि रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने के लिए आपात फंड का इस्तेमाल न करें। अगर किसी सि्थति में आप इसका इस्तेमाल कर भी लेते हैं तो जल्द-से-जल्द इसकी भरपाई कर लें।