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ईडी की बड़ी कार्रवाई: Xiaomi पर कसा शिकंजा, कंपनी के बैंक खातों में जमा 5551 करोड़ रुपये जब्त

Sat, 30 Apr 2022 03:36 PM IST
दीपक चतुर्वेदी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) चीनी कंपनी शाओमी पर अपना शिकंजा कसता जा रहा है। शनिवार को इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ईडी ने बैंक खातों में जमा शाओमी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के 5551.27 करोड़ रुपये जब्त कर लिए। 
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ईडी की कार्रवाई - फोटो : ANI
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विस्तार
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स्मार्टफोन निर्माता चीनी कंपनी Xiaomi पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अपना शिकंजा कसता जा रहा है। शनिवार को इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ईडी ने बैंक खातों में जमा शाओमी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के 5551.27 करोड़ रुपये जब्त कर लिए। इस संबंध में जारी एक बयान में कहा गया कि ईडी ने कंपनी द्वारा किए गए गोरखधंधे में विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 के तहत इस कार्रवाई को अंजाम दिया है। 

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एमआई ब्रांड के साथ भारत में कारोबार
गौरतलब है कि कंपनी भारत में एमआई (MI) और रेडमी (Redmi) ब्रांड नाम के तहत मोबाइल फोन का कारोबार करती है। ईडी ने शनिवार को की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि शाओमी इंडिया चीन स्थित शाओमी ग्रुप की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है। एजेंसी ने कहा कि फरवरी 2022 में चीनी फर्म द्वारा विदेश भेजे गए कथित अवैध प्रेषण के संबंध में कंपनी के खिलाफ जांच शुरू की गई थी। इसके बाद विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) की संबंधित धाराओं के तहत खातों में जमा राशि की जब्ती की गई है।

2015 से पैसे भेजना शुरू किया
रिपोर्ट के मुताबिक, Xiaomi इंडिया ने वर्ष 2014 में देश में अपना परिचालन शुरू किया था और वर्ष 2015 से बाहर पैसे भेजना शुरू कर दिया था। कंपनी ने तीन फॉरेन बेस्ड कंपनियों को रॉयल्टी की आड़ में 5551.27 करोड़ रुपये के बराबर विदेशी मुद्रा का प्रेषण किया। इन कंपनियों में शाओमी समूह की एक एंटिटी का नाम भी शामिल है। रॉयल्टी के नाम पर ये भारी-भरकम राशि शाओमी ग्रुप की एंटिटीज के निर्देश पर भेजी गई थी, जबकि अन्य दो कंपनियां अमेरिकी थीं। 
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तीनों कंपनियों की नहीं लीं सेवाएं
ईडी ने अपने बयान में कहा कि शाओमी इंडिया मोबाइल फोन के निर्माण से लेकर उसके वितरण तक की जिम्मेदारी संभालती रही, जबकि उसने इन तीनों विदेशी कंपनियों से कभी कोई सेवा नहीं ली। लेकिन, इन कंपनियों को पैसे जरूर भेजे जाते रहे। कंपनी ने रॉयल्टी के नाम पर विदेश में इतनी बड़ी राशि भेजी, जो फेमा की धारा 4 का सीधा उल्लंघन है। कंपनी की ओर से विदेशों में पैसा भेजने को लेकर बैंकों को भी गलत जानकारी मुहैया कराई गई। 
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