आर्थिक सर्वे को पेश करने के बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रहमण्यन ने कहा कि वैश्विक सुस्ती के कारण ही भारत में भी इसका असर देखने को मिला है। वहीं इस बार के सर्वे में पूरा जोर आर्थिक समृद्धि पर रखा है।
संसद में आर्थिक सर्वे के पेश होने के बाद मुख्य आर्थिक सलाहाकार सुब्रमण्यन ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जिन कंपनियों ने 2008-12 के बीच सबसे ज्यादा उधार बैंकों से लिया था, उन्होंने 2013-17 के बीच सबसे कम निवेश किया। इसकी वजह से भी देश में सुस्ती देखने को मिली है। 2017 से सुस्ती का माहौल देश में देखने को मिल रहा है। निवेश न बढ़ने के कारण देश ऐसी हालत में पहुंच गया। अगर निवेश को बढ़ावा दिया जाता तो फिर हमें फिलहाल चल रही वैश्विक मंदी से किसी तरह का कोई फर्क नहीं पड़ता।
सुब्रहमण्यन ने आगे कहा कि अगर विलफुल डिफॉल्टर घोटाला नहीं करते, तो सरकार के पास इतनी राशि होती, जिससे वो सोशल सेक्टर पर खर्च कर सकती थी।
अगर देश में सभी लोगों की आर्थिक समृद्धि होती है, तो फिर इसका अंत में देश को भी फायदा मिलेगा।