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Go First Row: 30 मई तक के लिए गो फर्स्ट की सभी उड़ानें रद्द, कंपनी ने संचालन से जुड़ी दिक्कतों का दिया हवाला

Sat, 27 May 2023 02:42 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Go First Row: कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि हम जानते हैं कि उड़ानों के रद्द होने से लोगों के यात्रा से जुड़े प्लान प्रभावित होते हैं। हम अपनी ओर से लोगों को हर संभव सहायता मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम जल्द ही एक बार फिर बुकिंग की प्रकिया शुरू करेंगे।  
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गो फर्स्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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गो फर्स्ट एयरलाइंस ने शनिवार को घोषणा की कि उसका उड़ान संचालन 30 मई तक रद्द रहेगा और यात्रियों को पूरा रिफंड जारी किया जाएगा। गो फर्स्ट ने संचालन संबंधी दिक्कतों का हवाला देकर 30 मई 2023 तक की सभी उड़ानों को रद्द करने का फैसला किया है। विमानन कंपनी की ओर से कहा गया है कि ग्राहकों को भुगतान के मोड के अनुसार जल्द ही रिफंड कर दिया जाएगा। कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि हम जानते हैं कि उड़ानों के रद्द होने से लोगों के यात्रा से जुड़े प्लान प्रभावित होते हैं। हम अपनी ओर से लोगों को हर संभव सहायता मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम जल्द ही एक बार फिर बुकिंग की प्रकिया शुरू करेंगे।

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इससे पहले नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने संकटग्रस्त गो फर्स्ट से अपने परिचालन के पुनरुद्धान के लिए एक व्यापक योजना पेश करने को कहा था। नियामक ने इसके लिए विमानन कंपनी को तीस दिन का समय दिया है। कंपनी ने तीन मई को को उड़ान बंद कर दी थी। एक सूत्र ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
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नियामक के एक सूत्र ने बताया कि नियामक ने 24 मई को एयरलाइन को परिचालन के सतत पुनरुद्धार के लिए तीस दिनों की अवधि के भीतर एक व्यापक पुनरुद्धार योजना पेश करने की सलाह दी है। सूत्र ने कहा कि नियामक ने एयरलाइन से ऑपरेशनल विमानों, पायलटों और अन्य कर्मियों की उपलब्धता, रखरखाव व्यवस्था और वित्त पोषण की स्थिति और अन्य विवरण प्रस्तुत करने के लिए कहा है। सूत्र ने कहा कि गो फर्स्ट द्वारा प्रस्तुत पुनरुद्धार योजना की आगे की उचित कार्रवाई के लिए डीजीसीए द्वारा समीक्षा की जाएगी।

गो फर्स्ट के विमान पट्टेदारों ने हाईकोर्ट से की ये अपील

गो फर्स्ट के विमान पट्टेदारों ने शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष विमानन नियामक डीजीसीए को अपने विमानों का पंजीकरण रद्द करने का निर्देश देने की मांग की ताकि वे उन्हें संकटग्रस्त एयरलाइन से वापस ले जा सकें। पट्टेदारों ने उच्च न्यायालय के समक्ष कहा कि नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) की ओर से पंजीकरण रद्द करने से इनकार करना 'अवैध' है। डेढ़ घंटे से अधिक समय तक याचिकाकर्ता पट्टादाताओं की दलीलें सुनने वाली न्यायमूर्ति तारा वितस्ता गंजू ने प्रतिवादियों की दलीलें सुनने के लिए मामले को 30 मई के लिए सूचीबद्ध कर दिया। उच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों से अगली सुनवाई से एक दिन पहले लिखित दलीलें दाखिल करने को भी कहा।

इन विमान पट्टेदारों ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा

उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने वालों में एसिपिटर इन्वेस्टमेंट एयरक्राफ्ट 2 लिमिटेड, ईओएस एविएशन 12 (आयरलैंड) लिमिटेड, पेमब्रोक एयरक्राफ्ट लीजिंग 11 लिमिटेड और एसएमबीसी एविएशन कैपिटल लिमिटेड शामिल हैं। दिवाला समाधान प्रक्रिया के मद्देनजर गो फर्स्ट की संपत्तियों के हस्तांतरण और वित्तीय दायित्वों पर रोक लागू होने के कारण पट्टेदार एयरलाइन को पट्टे पर दिए गए विमान का पंजीकरण रद्द करने और वापस लेने में असमर्थ हैं। पट्टाधारकों के वकीलों ने कहा कि उन्होंने अपने विमान का पंजीकरण रद्द करने के लिए नागर विमानन नियामक से संपर्क किया था लेकिन उसने उनकी याचिका खारिज कर दी। उन्होंने कहा कि उन्हें डीजीसीए से कोई सूचना नहीं मिली है, लेकिन नियामक की वेबसाइट पर उनके आवेदनों की स्थिति की जांच करने पर, उन्होंने पाया कि उनके अनुरोधों को खारिज कर दिया गया है।

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