कृषि क्षेत्र में बढ़ा ड्रोन्स का इस्तेमाल।
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सरकार पिछले कुछ सालों से कृषि क्षेत्र में फसल के लिए जमीन की मापी, पोषक तत्व, उर्वरक और सिंचाई जैसी गतिविधियों के लिए ड्रोन को बढ़ावा दे रही है। इसलिए मानव रहित हवाई वाहनों (यूएवी) की मांग में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। उद्योग के अनुमान के अनुसार वर्तमान में कृषि क्षेत्र में 3,000 से अधिक के ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है। वित्त वर्ष 2025 तक यह संख्या 7,000 से अधिक सकती है। जानकारों का कहना है कि इससे पानी, मिट्टी के पोषक तत्वों और फसल सुरक्षा फॉर्मूलेशन के सही इस्तेमाल से फसल की उत्पादकता को बढ़ाने में काफी सहायता होती है।
कृषि क्षेत्र में ड्रोन्स हैं मददगार
ड्रोन निर्माता कंपनी दक्षा अनमैंड सिस्टम्स के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025 के अंत तक सरकार के सर्मथन से ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ सकता है। इसके इस्तेमाल से कृषि क्षेत्र में पानी का उपयोग 70 प्रतिशत तक कम हो सकता है। साथ ही ड्रोन्स उर्वरक के उपयोग में भी 20 से 30 प्रतिशत तक की कमी लाने में मदद करेंगे। उद्योग जगत का मानना है कि वर्तमान में कृषि क्षेत्र में 3,000 से अधिक के ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है, वित्त वर्ष 2025 तक यह संख्या 7,000 से अधिक हो सकती है। ड्रोन निर्माताओं के अनुसार फिलहाल ड्रोन्स की कीमतें 6 से 7 लाख रुपये के बीच हैं। नैनो यूरिया और डाय-अमोनियम फॉस्फट (डीएपी) को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख सहकारी संस्था इफको ने जुलाई 2023 में नैनो मिट्टी पोषक तत्वों का छिड़काव करने के लिए 2500 ड्रोन की खरीदारी करने की घोषणा की थी। सहकारी संस्था ने जानकारी देते हुए बताया था कि इन्हें ऑपरेट करने के लिए 5000 ग्रामीण उद्यमियों को प्रशिक्षण दी जा रही है।
कृषि के अलावे अन्य उद्योगों में भी ड्रोन्स का इस्तेमाल बढ़ेगा
ड्रोन उपकरणों को संचालित करने वाली और ड्रोन पायलट्स को प्रशिक्षण देने वाली कंपनी ड्रोन डेस्टिनेशन के प्रबंध निदेशक चिराग शर्मा भी इस नए उद्योग के भविष्य को लोकर आशान्वित हैं। वे बताते हैं कि अगले कुछ सालों में कृषि के साथ अन्य उद्योगों के परिचालन में भी ड्रोन्स का इस्तेमाल बढ़ेगा। आने वाले समय में विभिन्न उद्योगों में ड्रोन्स का इस्तेमाल बढ़कर 10,000 से 15,000 तक पहुंच सकता है। उन्होंने बताया कि कंपनी ने भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए 5000 ड्रोन पायलट्स को प्रशिक्षित किया है। हम नमो ड्रोन दीदी योजना का हिस्सा हैं। इसके तहत कंपनी ने अभी तक 600 से अधिक ड्रोन दीदी को प्रशिक्षित किया है। शर्मा ने कहा कि आने वाले समय में ड्रोन संचालन और रखरखाव से जुड़ी सेवाओं में भी बढ़ोतरी होगी।
ड्रोन दीदी योजना के तहत 600 से अधिक महिलाएं की गईं प्रशिक्षित
नमो दीदी योजना या ड्रोन दीदी योजना की शुरुआत नवबंर 2023 में हुई थी। इसके तहत सरकार महिलाओं की कृषि क्षेत्र में हिस्सेदारी को बढ़ाना चाहती है। इस योजना के अंतर्गत सरकार 1,261 करोड़ रुपये खर्च करेगी। अगले कुछ वर्षों में इस रकम को खर्च किया जाना है। इस योजना के तहत सरकार की तरफ से 15,000 महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को ड्रोन उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। इस योजना को देश भर में कृषि विज्ञान केन्द्रों के जरिए लागू किया गया है। देश भर में लगभग 10 करोड़ महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुईं हैं। इसके तहत ड्रोन डेस्टिनेशन ने अभी तक 600 से अधिक ड्रोन दीदी को प्रशिक्षित किया है। कृषि के अलावा माइनिंग, सुरक्षा, शहरी योजनाओं के मानचित्र, भूमि और संसाधन की जांच, जंगल की आग रोकथाम, बाढ़ और सूखा प्रभावित इलके, पर्यावरण निगरानी, सीमा निगरानी के अलावा कई महत्वपूर्ण जगहों पर ड्रोन का इस्तेमाल किया जाता है।