Supreme Court: सीमा शुल्क विभाग ने 9 मार्च, 2021 के फैसले की समीक्षा की मांग की है। जिसमें तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने माना था कि डीआरआई अधिकारियों को सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत सीमा शुल्क विभाग द्वारा आयात के लिए पहले से मंजूरी दे दी गई वस्तुओं पर शुल्क की वसूली का अधिकार नहीं है।
सीमा शुल्क विभाग ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) के अधिकारियों को सीमा शुल्क अधिनियम के तहत आयात के लिए पहले से मंजूरी प्राप्त वस्तुओं पर शुल्क वसूली की मांग करने का भी अधिकार है।
विज्ञापन
सीमा शुल्क विभाग ने 9 मार्च, 2021 के फैसले की समीक्षा की मांग की है। जिसमें तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने माना था कि डीआरआई अधिकारियों को सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत सीमा शुल्क विभाग द्वारा आयात के लिए पहले से मंजूरी दे दी गई वस्तुओं पर शुल्क की वसूली का अधिकार नहीं है।
शीर्ष अदालत ने मेसर्स कैनन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड सहित निजी फर्मों को डीआरआई द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस को खारिज कर दिया था, जिसमें शुल्क का भुगतान करने, नहीं करने पर माल जब्त करने, ब्याज की मांग करने और सीमा शुल्क अधिनियम के तहत जुर्माना लगाने की मांग की गई थी।
विज्ञापन
विभाग की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमन ने मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि फैसले में रिकॉर्ड के आधार पर छह स्पष्ट त्रुटियां हैं, जो इस निष्कर्ष पर पहुंचने के दौरान कानून के अपेक्षित प्रावधानों को संबोधित करने में विफल रहीं कि डीआरआई अधिकारी सीमा शुल्क अधिकारी नहीं हैं जो माल पर शुल्क की वसूली की मांग कर सकते हैं।
विधि अधिकारी ने पीठ से कहा, "आज का डीआरआई अधिकारी कल सीमा शुल्क अधिकारी हो सकता है।" पीठ में न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे।"