अकेले दिल्ली में हर साल 9.6 लाख टन पेट्रोल और 12.65 लाख टन डीजल की खपत होती है। तेल मार्केटिंग कंपनियां इस फ्यूल को यूपी की मथुरा रिफाइनरी, हरियाणा की पानीपत रिफाइनरी, मध्य प्रदेश की बीना रिफाइनरी और पंजाब की भठिंडा रिफाइनरी में तैयार करने लगी है।
इस वजह से लिया था फैसला
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए यूरो6 मानक का पेट्रोल-डीजल बेचने के लिए पहले डेडलाइन लागू की गई है। केंद्र सरकार का मानना है कि इससे राजधानी में प्रदूषण कम करने में काफी 10 से 20 फीसदी की मदद मिलेगी। यूरो-6 पेट्रोल-डीजल में 10 पीपीएम सल्फर होगा, जो कि यूरो-4 मानक वाले पेट्रोल-डीजल में 50 पीपीएम सल्फर होता है।
अभी कम है यूरो6 मानक वाले वाहनों की संख्या
फिलहाल राजधानी में ऐसे वाहनों की संख्या काफी कम है जिनका इंजन यूरो6 मानकों के अनुरूप है। जब सभी वाहनों के इंजन इस मानक के तहत हो जाएंगे तभी जाकर के प्रदूषण से राहत मिलने की उम्मीद है। दिल्ली में फिलहाल बड़े वाहन जैसे कि ट्रक, डंफर, कैंटर आदि बाहरी राज्यों से आते हैं, जिसकी वजह से प्रदूषण में कमी नहीं हो रही है।