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Business Updates: रक्षा मंत्रालय ने BEL से ₹5,300 करोड़ से अधिक का किया करार, तोपों के लिए ये बनाएगी कंपनी

Fri, 15 Dec 2023 07:44 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Business Updates: इलेक्ट्रॉनिक फ्यूज मध्यम से भारी कैलिबर वाली तोपों का एक अभिन्न पुर्जा है। मंत्रालय ने कहा कि तोपों के इस्तेमाल के लिए फ्यूज की खरीद की जा रही है। उसने कहा कि ये तोप उत्तरी सीमाओं पर ऊंचाई वाले इलाकों समेत विभिन्न तरह के भूभाग में घातक वार करने में सक्षम हैं।
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रक्षा मंत्रालय।
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विस्तार
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रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के वास्ते 10 साल की अवधि के लिए इलेक्ट्रॉनिक फ्यूज की खरीद के लिहाज से सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड (बीईएल) के साथ शुक्रवार को 5,300 करोड़ रुपये से अधिक का करार किया।

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इलेक्ट्रॉनिक फ्यूज मध्यम से भारी कैलिबर वाली तोपों का एक अभिन्न पुर्जा है। मंत्रालय ने कहा कि तोपों के इस्तेमाल के लिए फ्यूज की खरीद की जा रही है। उसने कहा कि ये तोप उत्तरी सीमाओं पर ऊंचाई वाले इलाकों समेत विभिन्न तरह के भूभाग में घातक वार करने में सक्षम हैं।



उसने कहा कि परियोजना का उद्देश्य निर्यात को कम करने के लिए गोला-बारूद का भंडार बढ़ाना है। उसने कहा, ‘‘रक्षा मंत्रालय ने 15 दिसंबर को 10 साल की अवधि के लिए भारतीय सेना के वास्ते इलेक्ट्रॉनिक फ्यूज की खरीद के लिहाज से भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, पुणे के साथ ऐतिहासिक समझौते पर दस्तखत किए।’’
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मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के तहत ‘भारतीय उद्योग द्वारा भारतीय सेना के लिए उपकरणों के विनिर्माण’ के तहत खरीद के वास्ते करार किया गया है।’’ इलेक्ट्रॉनिक फ्यूज का उत्पादन बीईएल के पुणे और नागपुर संयंत्र में किया जाएगा।"

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भारत ने डब्ल्यूटीए पैनल के फैसले के खिलाफ की अपील
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वाणिज्य मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव पीयूष कुमार ने यहां संवाददाताओं से कहा, 'भारत और यूरोपीय संघ एमएएस पर पहुंचने के लिए पिछले सात महीने से बातचीत कर रहे थे, लेकिन यूरोपीय संघ ने अब पैनल की रिपोर्ट को स्वीकार करने के लिए सात दिसंबर को आवेदन किया है और इसलिए भारत ने आठ दिसंबर को डब्ल्यूटीओ में इसके खिलाफ अपील की है। एमएएस के हिस्से के रूप में, यूरोपीय संघ कुछ वस्तुओं पर सीमा शुल्क रियायतों की मांग कर रहा था, जो भारत को स्वीकार्य नहीं था क्योंकि यह डब्ल्यूटीओ नियमों का उल्लंघन करता है। कुमार ने कहा कि ये रियायतें केवल मुक्त व्यापार समझौते में दी जा सकती हैं।
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दूरसंचार उपकरण विनिर्माण के लिए पीएलआई स्कीम के तहत सरकार को 2725 करोड़ का मिला निवेशः मंत्री 
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