भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने खाद्य लेबलिंग, विज्ञापन और दावों के नियमों पर चर्चा करने के लिए उच्चस्तरीय राष्ट्रीय हितधारक परामर्श का आयोजन किया। इस दौरान केंद्र ने उद्योगों से कहा कि वे खाद्य उत्पादों की लेबलिंग और विज्ञापनों में ईमानदार और नैतिक तरीके अपनाएं, ताकि लोगों की सेहत सुरक्षित रहे और ग्राहकों का भरोसा भी बना रहे।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने दिल्ली में खाद्य लेबलिंग, विज्ञापन और दावों पर उच्चस्तरीय राष्ट्रीय हितधारक परामर्श का आयोजन किया। उपभोक्ता मामलों के विभाग की सचिव निधि खरे ने भ्रामक विज्ञापनों को समाप्त करने का आह्वान किया। उन्होंने निर्माताओं से आग्रह किया कि वे लेबलिंग को केवल विपणन उपकरण के बजाय विश्वास का कारक मानें।
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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, परामर्श का उद्देश्य नियमों की समीक्षा, कार्यान्वयन की चुनौतियों का समाधान करना और उपभोक्ता संरक्षण, जन स्वास्थ्य और उद्योग नवाचार को बढ़ावा देने के लिए भारत के मानकों को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप बनाना था।
हमें खाद्य उत्पादों की अधिक बारीकी से करनी होगी जांच: स्वास्थ्य सचिव
स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने खाद्य क्षेत्र में लेबलिंग और विज्ञापन में नैतिक और सत्यनिष्ठ प्रथाओं के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, 'आज चीजें तेजी से बदल रही हैं। अब हम पूरी दुनिया के संपर्क में हैं। इसका मतलब है कि हमें खाद्य उत्पादों की अधिक बारीकी से जांच करनी होगी।'
झूठे स्वास्थ्य और पोषण संबंधी दावों के खिलाफ दी चेतावनी
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने विज्ञापनों में वैज्ञानिक दावों के बाहरी सत्यापन की जरूरत पर जोर दिया। सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रभात ने झूठे स्वास्थ्य और पोषण संबंधी दावों के खिलाफ चेतावनी दी और बताया कि इनसे जनता का विश्वास कम हो सकता है और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंच सकता है।
हितधारक परामर्श में 700 प्रतिनिधियों ने लिया भाग
इस हितधारक परामर्श में केंद्र और राज्य सरकारों, वैज्ञानिक विशेषज्ञों, खाद्य व्यवसायों, उद्योग संघों, उपभोक्ता संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों के लगभग 700 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।