COP28: दुबई जलवायु वार्ता के मूल पाठ में पेरिस समझौते और उनकी विभिन्न राष्ट्रीय परिस्थितियों, मार्गों और दृष्टिकोणों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित" ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में गहरी, तेज और निरंतर" कमी का आह्वान किया गया।
जीवाश्म ईंधन से दूर जाने से जुड़े ऐतिहासिक समझौते 'ग्लोबल स्टॉकटेक टेक्स्ट' को बुधवार को दुबई में वार्षिक जलवायु वार्ता सीओपी28 के अंतिम सत्र में बिना किसी आपत्ति के स्वीकार कर लिया गया। सीओपी 28 के अध्यक्ष सुल्तान अल-जबर ने जब समझौते को मंजूरी दी तो कमरा तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
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दुबई जलवायु वार्ता के मूल पाठ में पेरिस समझौते और उनकी विभिन्न राष्ट्रीय परिस्थितियों, मार्गों और दृष्टिकोणों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित" ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में गहरी, तेज और निरंतर" कमी का आह्वान किया गया।
हालांकि, पिछले संस्करणों के विपरीत इस बार के समझौते में नए और निर्बाध कोयला बिजली उत्पादन की अनुमति को सीमित करने के संदर्भों का अभाव है। यह कमी भारत और चीन जैसे देशों जो कोयले पर बहुत ज्यादा निर्भर देश हैं के लिए झटके की तरह है।
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समझौते को स्वीकार करने के बाद सभा को संबोधित करते हुए, सुल्तान अल-जबर ने कहा कि यह एक मजबूत कार्य योजना है जिसमें 1.5 डिग्री को पहुंच के भीतर रखने की योजना है। उनके अनुसार "यह एक संतुलित योजना है जो उत्सर्जन से निपटती है, अनुकूलन पर अंतर को कम करते हुए वैश्विक वित्त की फिर से कल्पना करती है और नुकसान और क्षति को पूरा करती है।
ऐतिहासिक दस्तावेज में इसे हासिल करने के लिए आठ सूत्री योजना रखी गई है, जिसमें ऊर्जा प्रणालियों में उचित, व्यवस्थित और न्यायसंगत तरीके से जीवाश्म ईंधन से दूर होने की बात कही है। इसके अनुसार 050 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन का (वायुमंडल से उत्सर्जित और हटाए गए ग्रीनहाउस गैसों के बीच संतुलन) लक्ष्य हासिल करना है। COP28 के पहले दिन लॉस एंड डैमेज फंड का भी संचालन किया गया।