कोल इंडिया कोयले के उत्पादन में बढ़ोतरी के साथ कोयले की गुणवत्ता पर भी ध्यान दे रही है। पर्यावरण सुरक्षा के मद्देनजर कोल इंडिया ने कोयले की आपूर्ति के पहले अधिक से अधिक कोयले की धुलाई की योजना बनाई है। इस योजना को अंजाम देने के लिए कोल इंडिया अगले साल अक्तूबर तक 15 वाशरीज की स्थापना करने जा रही है।
कोयले की गुणवत्ता से ही कोल इंडिया का राजस्व जुड़ा है क्योंकि बिजली प्लांट कोयले का भुगतान ग्रॉस कैलोरिफिक वैल्यू (जीसीवी) पर करते हैं। मतलब कोयले के निकलने वाली ऊर्जा के आधार पर कोयले की कीमत का भुगतान किया जाता है। वहीं चालू वित्त्त वर्ष 2016-17 के लिए कोल इंडिया ने 59.8 करोड़ टन कोयले के उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। गत वित्त वर्ष में पहली बार कोल इंडिया का उत्पादन में 50 करोड़ टन से अधिक रहा।
कोयला मंत्रालय ने वर्ष 2022 तक कोल इंडिया के उत्पादन को 100 करोड़ टन करने का लक्ष्य रखा गया है। कोयला सचिव अनिल स्वरूप के मुताबिक अक्टूबर, 2017 तक कोल इंडिया 15 वाशरीज स्थापित करने जा रही है। इन वाशरीज की स्थापना को लेकर प्रक्रिया शुरू हो गई है। कोयला मंत्रालय के मुताबिक गत वित्त वर्ष 2015-16 में कोयले के उत्पादन में बढ़ोतरी की वजह से कोयले के आयात में कमी आई है जिससे 28000 करोड़ रुपये की बचत हुई। कोयला मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में कोयले के आयात में कमी आने की वजह से 40000 करोड़ रुपये बकी बचत का अनुमान है।