भारतीय उद्योग परिसंघ की ओर से सीईओ के बीच कराए गए पोल में सामने मौजूदा वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन को लेकर उत्साहजनक तस्वीर सामने आई है। हालांकि, इसमें ओमिक्रॉन से खतरे को लेकर आशंका भी व्यक्त की गई है।
वर्तमान वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था में जोदार उछाल आने की संभावना है। इस दौरान अर्थव्यवस्था में नौ से 10 फीसदी की बढ़त दर्ज की जा सकती है। यह बात भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों के बीच कराए गए सीईओ पोल में कही गई है। हालांकि, इस पोल में शामिल होने वाले कई सीईओ ने चिंता जताई है कि कोरोना वायरस का नया ओमिक्रॉन वैरिएंट सेवाओं और उत्पादन क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है। इस पोल लगभग 100 सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) ने भागीदारी की थी।
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केंद्र सरकार के कदमों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद
सीआईआई की ओर से इस पोल को लेकर रविवार को जारी की गई एक विज्ञप्ति के अनुसार वृद्धि के बारे में बात करें तो लगभग 10 फीसदी सीईओ मानते हैं कि 2021-22 के दौरान यह 10 फीसदी के आंकड़े को पार कर सकती है। सीआईआई के अध्यक्ष टीवी नरेंद्र ने कहा कि सरकार का सार्वजनिक कार्यों पर जोर, लिक्विडिटी को बढ़ावा देने के लिए समय पर दखल, हाल के समय में नियमों को आसान बनाना, उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाओं समेत कई अन्य साहसिक सुधारों ने उच्च आर्थिक विकास पर उम्मीद बढ़ाई है।
अर्थव्यवस्था, राजस्व और सरल लाभ पर ये उम्मीद
56 फीसदी सीईओ का कहना है कि 2021-22 के दौरान देश की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर नौ से 10 फीसदी के बीच तो 10 फीसदी ने कहा है कि यह 10 फीसदी से भी अधिक रह सकती है। 35 फीसदी ने कहा कि इस वित्त वर्ष में राजस्व में 10 से 20 फीसदी का इजाफा हो सकता है। 33 फीसदी सीईओ ने कहा कि राजस्व में बढ़ोतरी 20 फीसदी से अधिक रह सकती है। 35 फीसदी ने सकल लाभ में 35 फीसदी से अधिक इजाफे की उम्मीद जताई तो 17 फीसदी ने कहा कि सकल लाभ 10 से 20 फीसदी के बीच रह सकता है।
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कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट पर यह बोले सीईओ
वहीं, कारोबार पर ओमिक्रॉन वैरिएंट के असर को लेकर 55 फीसदी सीईओ ने आशंका जताई है कि कोरोना वायरस के नए वैरिएंट के फैलने की वजह से सेवा क्षेत्र पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसके अलावा 34 फीसदी सीईओ ने कहा कि यह उत्पादन क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। बता दें कि देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट की दस्तक के बीच राष्ट्रीय सुपरमॉडल समिति ने यह आशंका जताई है कि इस वैरिएंट की वजह से अगले साल की शुरुआत में देश में इस जानलेवा महामारी की तीसरी लहर आ सकती है।