चीन की औद्योगिक गतिविधि अक्तूबर में लगातार सातवें महीने सिकुड़ी है। शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश का आधिकारिक विनिर्माण परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) सितंबर के 49.8 से घटकर अक्तूबर में 49 पर आ गया। चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (एनबीएस) ने यह जानकारी फैक्ट्री प्रबंधकों के सर्वेक्षण के आधार पर दी।
यह आंकड़ा बाजार अनुमान से भी कमजोर रहा है और 50 के स्तर से नीचे होने का मतलब है कि विनिर्माण क्षेत्र में संकुचन जारी है। हालांकि हाल ही में अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध पर अस्थायी समझौते की घोषणा से निर्यात और औद्योगिक गतिविधियों में सुधार की उम्मीद बनी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने गुरुवार को कहा कि दक्षिण कोरिया में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी बैठक के बाद अमेरिका चीन पर फेंटानिल से संबंधित टैरिफ को 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर देगा। इससे चीनी वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ 57 प्रतिशत से घटकर 47 प्रतिशत हो जाएगा।
एचएसबीसी के अर्थशास्त्री टेलर वांग ने शुक्रवार को एक नोट में लिखा कि अमेरिकी टैरिफ कटौती का मतलब है कि चीनी निर्यात अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धात्मकता हासिल करने में सक्षम होंगे और हम जल्द ही अमेरिका को प्रत्यक्ष निर्यात में कुछ सुधार देख सकते हैं।
हालांकि बीएनपी पारिबा सिक्योरिटीज (चीन) में मल्टी-एसेट इन्वेस्टमेंट्स के प्रमुख वेई ली ने कहा कि टैरिफ युद्धविराम की प्रगति के बावजूद, वैश्विक अनिश्चितता विनिर्माण क्षेत्र की धारणा को प्रभावित कर रही है। ली ने कहा कि अमेरिका-चीन समझौते मजबूत सुधार को बढ़ावा देने के बजाय और गिरावट को रोकेंगे।
चीन अमेरिका से निर्यात में विविधता ला रहा है और दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में निर्यात बढ़ा रहा है। हालांकि, अमेरिका को होने वाले निर्यात में लगातार छह महीनों से दोहरे अंकों में गिरावट आई है।
सांख्यिकी ब्यूरो के मुख्य सांख्यिकीविद् हुओ लीहुई ने बताया कि अक्तूबर में चीन के आठ दिवसीय गोल्डन वीक राष्ट्रीय अवकाश ने कारखानों में गतिविधियों को धीमा कर दिया। उन्होंने कहा कि ज्यादा जटिल अंतरराष्ट्रीय माहौल ने भी अक्तूबर के कमजोर आंकड़ों में योगदान दिया।
चीन विनिर्माण में निवेश पर अपनी निर्भरता को कम करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। यह उसके बड़े पैमाने पर निर्यात को बढ़ावा देता है, व उपभोक्ता खर्च को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। साथ ही कई उद्योगों में मूल्य युद्ध और अतिरिक्त विनिर्माण क्षमता पर अंकुश लगाने का प्रयास कर रहा है। संपत्ति बाजार में लंबे समय से जारी मंदी के कारण उपभोक्ता विश्वास, निर्माण व रियल एस्टेट में निवेश पर असर पड़ रहा है।