केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सोमवार को कृषि क्षेत्र से संबंधित सात बड़ी योजनाओं को मंजूरी दी। इन योजनाओं पर सरकार करीब 14,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इन योजनाओं में 2,817 करोड़ रुपये का डिजिटल कृषि मिशन और फसल विज्ञान के लिए 3,979 करोड़ रुपये की योजना शामिल है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट की बैठक के दौरान गुजरात के साणंद में एक सेमीकंडक्टर इकाई स्थापित से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। यह प्रस्ताव कायन्स सेमीकॉन प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दी गई थी। प्रस्तावित इकाई 3,300 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित की जाएगी।
एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, इस इकाई की क्षमता प्रतिदिन 60 लाख चिप्स होगी। इस इकाई में उत्पादित चिप्स विभिन्न प्रकार क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करेंगे जिनमें औद्योगिक, ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रिक वाहन, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार और मोबाइल फोन जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
भारत में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के विकास के लिए एक कार्यक्रम को 21 दिसंबर, 2021 को 76,000 करोड़ रुपये की लागत के साथ अधिसूचित किया गया था।
जून, 2023 में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुजरात के साणंद में एक सेमीकंडक्टर इकाई स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। फरवरी, 2024 में, तीन और सेमीकंडक्टर इकाइयों को मंजूरी दी गई। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स गुजरात के धोलेरा में एक सेमीकंडक्टर फैब और असम के मोरीगांव में एक सेमीकंडक्टर यूनिट स्थापित कर रही है।
सीजी पावर गुजरात के साणंद में एक सेमीकंडक्टर यूनिट स्थापित कर रही है। सेमीकंडक्टर यूनिटों का निर्माण तेजी से चल रहा है और यूनिटों के पास एक मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम उभर रहा है। ये यूनिट्स लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश लाएंगे और इनकी संचयी क्षमता लगभग 7 करोड़ चिप्स प्रतिदिन होगी।
टाटा समूह को उम्मीद है कि गुजरात और असम में दो प्लांटों में सेमीकंडक्टर चिप्स का व्यावसायिक उत्पादन 2026 में शुरू हो जाएगा। कोविड के दौरान चिप की कमी ने राष्ट्रीय सुरक्षा की कमी को पूरा करने और स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए स्वदेशी विनिर्माण के महत्व को उजागर किया। गुजरात के साणंद में अमेरिकी चिप निर्माता माइक्रोन का हाई-एंड सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट, जो भारत का पहला है, तेजी से बन रहा है। इसके 2024 के अंत में शुरू होने की उम्मीद है।