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Biz Updates:: इंडियाबुल्स मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश, सीबीआई करेगी सभी छह संदिग्ध लेनदेन की जांच

Tue, 18 Aug 2026 05:20 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े संदिग्ध लेनदेन के सभी छह आरोपों की सीबीआई जांच का आदेश दिया है। पहले दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने पांच आरोपों में क्लीन चिट दी थी, लेकिन अब सीबीआई स्वतंत्र रूप से जांच करेगी। पढ़ें कारोबार जगत से जुड़ी कुछ अहम खबरें।
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बिजनेस न्यूज एंड अपडेट्स - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (आईएचएफएल) और संबंधित संस्थाओं से जुड़े कथित संदिग्ध लेनदेन के सभी छह आरोपों की जांच का जिम्मा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपा है। ये आरोप प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उजागर किए थे। अदालत ने 28 जुलाई को सीबीआई और दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) के आचरण को चौंकाने वाला और अदला-बदली का मामला बताते हुए फटकार लगाई थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने मंगलवार को यह महत्वपूर्ण निर्देश दिया।

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अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने जांच एजेंसियों की ओर से पेश होते हुए बताया कि ईडी ने छह आरोप लगाए थे। इनमें से पांच पहलुओं की जांच ईओडब्ल्यू कर रहा था। ईओडब्ल्यू ने अपनी जांच में इन पांचों आरोपों में क्लीन चिट दे दी थी। उसने आगे की जांच को उचित नहीं माना था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को ईओडब्ल्यू के निष्कर्षों या रिपोर्ट की परवाह किए बिना इन पांच आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच करने का निर्देश दिया है। सीबीआई को इस संबंध में एक व्यापक रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी।

क्या हैं मुख्य आरोप और उनकी प्रकृति?
छठा आरोप 1,575 करोड़ रुपये के कथित मार्ग से संबंधित है। सीबीआई ने मुंबई की विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत में इसकी जांच के लिए अनुमति मांगी है। अदालत ने मुंबई के विशेष न्यायाधीश को 24 अगस्त को सुनवाई के बाद दो सप्ताह के भीतर सीबीआई के आवेदन पर निर्णय लेने को कहा है। सीबीआई को इसके बाद सुप्रीम कोर्ट को एक प्रगति रिपोर्ट सौंपनी होगी। सिटीजन व्हिसल ब्लोअर फोरम द्वारा दायर एक याचिका पर ये निर्देश दिए गए हैं। याचिका में ईडी के निष्कर्षों पर भरोसा किया गया था।
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धन के हेरफेर और ऋणों का एवरग्रीनिंग कैसे हुआ?
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने बताया कि ईडी की शिकायत में प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और धन के डायवर्जन के आरोप सामने आए हैं। इसमें सार्वजनिक धन से वित्तपोषित ऋणों के एवरग्रीनिंग का भी जिक्र है। भारतीय रिजर्व बैंक के परिपत्र के अनुसार, 50 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक धोखाधड़ी की जांच सीबीआई द्वारा अनिवार्य है। आरोपों में अमेरिकॉर्प समूह की संस्थाओं को दिए गए लगभग 1,693 करोड़ रुपये के ऋण शामिल हैं। भूषण ने कहा कि कथित तौर पर इन ऋण निधियों को इंडियाबुल्स संस्थाओं के शेयरों में वापस भेज दिया गया था। इस हेरफेर से शेयरों की कीमतों उतार में उतार-चढ़ाव कर लाभ हासिल किया गया।


FSSAI की नोटिस के बाद डाबर, फर्न्स एन पेटल्स और चार अन्य कंपनियों ने अपनी गलतियों को सुधारा
खाद्य नियामक एफएसएसएआई ने मंगलवार को कहा कि डाबर इंडिया और फर्न्स एन पेटल्स सहित छह कंपनियों ने भ्रामक लेबल, दावों और विज्ञापनों के लिए जारी नोटिस के बाद अपनी गलतियों को सुधार लिया है।

एक सोशल मीडिया पोस्ट में, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने नियामक द्वारा जारी नोटिस के बाद खाद्य व्यवसाय संचालकों (एफबीओ) द्वारा की गई 'सुधारात्मक कार्रवाई' के बारे में जनता को सूचित किया।

ये छह कंपनियां हैं: लोटे इंडिया कॉर्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड, डाबर इंडिया, फर्न्स एन पेटल्स प्राइवेट लिमिटेड, ईट बेटर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड, एसएस प्रोडक्ट प्रॉप और ओम साई हेल्थकेयर।

"एफएसएसएआई से नोटिस मिलने के बाद, प्रमुख खाद्य और व्यावसायिक कंपनियों ने तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई की है। नियामक ने पोस्ट में कहा, "उपभोक्ता सुरक्षा और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए भ्रामक लेबल दावों को वापस लेने से लेकर उत्पाद पैकेजिंग में संशोधन तक के उपाय किए गए हैं।"

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डिजिटल भुगतान बढ़ने के बावजूद नकदी उपयोग की पहेली से जूझ रहा आरबीआई
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) डिजिटल भुगतान में वृद्धि के बावजूद चलन में मुद्रा के बढ़ते उपयोग की 'पहेली' से जूझ रहा है। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर एस सी मुर्मू ने जकार्ता में एक वैश्विक सेमिनार में यह बात कही। उन्होंने कहा कि यह स्थिति भविष्य की मुद्रा मांग का अनुमान लगाना कठिन बनाती है।

मुर्मू ने इसे 'नकदी की पहेली' बताया। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान अपनाने के बावजूद चलन में मुद्रा दो अंकों की दर से बढ़ रही है। हालांकि, व्यक्तिगत लेनदेन में नकदी का हिस्सा घट रहा है। यह आरबीआई की उत्पादन और वितरण क्षमता की योजना को जटिल बनाता है। आरबीआई हर साल मुद्रा मांग का पांच साल का अग्रिम अनुमान लगाता है। ये अनुमान जीडीपी वृद्धि, ब्याज दरों और डिजिटल भुगतान अपनाने की गति पर आधारित होते हैं।

नकदी का बढ़ता चलन और आरबीआई के प्रयास
आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 के अंत तक चलन में मुद्रा लगभग 12 फीसदी बढ़कर 41.6 लाख करोड़ रुपये हो गई। इसी अवधि में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) के भुगतान की मात्रा में 21 फीसदी की वृद्धि देखी गई। आरबीआई बैंकनोटों का जीवन बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार कर रहा है। इसमें सतह पर कोटिंग और कम मूल्यवर्ग के लिए पॉलीमर नोट शामिल हैं। यह नकदी चक्र के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने पर भी काम कर रहा है।
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