Union Budget 2024: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि हम सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास और सबका विश्वास के सिद्धांत पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सिद्धांत अगले पांच वर्षों में भी जारी रहेगा और हम तब तक इसे जारी रखेंगे जब तक भारत विकसित देश नहीं बन जाता।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को राज्यसभा में बजट पर हुई चर्चा का जवाब दिया। वित्त मंत्री ने कहा कि बजट में किसी राज्य का नाम नहीं लेने का मतलब यह नहीं है कि उसे पैसे जारी नहीं किए गए।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि हम सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास और सबका विश्वास के सिद्धांत पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सिद्धांत अगले पांच वर्षों में भी जारी रहेगा और हम तब तक इसे जारी रखेंगे जब तक भारत विकसित देश नहीं बन जाता।
वित्त मंत्री ने कहा कि बजट के बाद विपक्ष झूठा प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश कर रहा है। वित्त मंत्री ने कहा कि कांग्रेस के शासन काल में भी बजट में कई राज्यों के नाम नहीं लिए जाते थे, क्या इसका यह मतलब है कि उस दौरान अन्य राज्यों को पैसे जारी नहीं किए गए।
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में बजट पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि यह सिर्फ मैं नहीं कह रही कई प्रतिष्ठित लोगों ने यह बात कही है कि तब (यूपीए के दौरान) किस तरह की चीजें हुईं। रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर ने अपनी किताब में लिखा है कि वित्त मंत्रालय आरबीआई पर अपनी ब्याज दरों को नरम करने के लिए दबाव डालता था और लोगों की भावनाओं को अपने पक्ष में करने के लिए विकास की एक गुलाबी तस्वीर पेश करता था।
वित्त मंत्री ने कहा, "नाजुक अर्थव्यवस्था एक ऐसी सच्चाई है जो उनके (यूपीए सरकार के) सामने थी, लेकिन उन्होंने इस पर कार्रवाई नहीं की, बल्कि इसके बजाय आरबीआई पर दबाव डाला। हमने ऐसे उपाय लागू किए जिनसे 2014-15 से 2018-19 के बीच औसत मुद्रास्फीति 4.5 प्रतिशत कम हो गई, और आरबीआई के 2-6 प्रतिशत के दायरे में रही। 2020 और 2023 के बीच भारत की मुद्रास्फीति वैश्विक औसत से बहुत कम थी।"