वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 01 फरवरी 2024 को अपना छठा बजट पेश करने वाली हैं। यह एक अंतरिम बजट होगा क्योंकि इस साल आम चुनाव होने हैं। चुनाव के बाद जब नई सरकार पदभार संभालेगी तब पूर्ण बजट पेश किया जाएगा। पिछले साल यानी वित्तीय वर्ष 2023-24 का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण के दौरान 'सप्तऋषि' का जिक्र किया। उन्होंने कहा था कि देश के विकास का यही आधार होगा। वित्त मंत्री ने मौजूदा समय को अमृतकाल बताया था और कहा था कि इस अमृतकाल में सात प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए देश का विकास होगा। इन सात प्राथमिकताओं को ही सप्तऋषि नाम दिया गया था। आइए समझते हैं कि आखिर ये सप्तऋषि क्या थे? इसमें सरकार ने किन-किन क्षेत्रों को शामिल किया गया? इस बार के बजट में क्या हो सकता है खास?
केंद्रीय वित्त मंत्री ने सप्तऋषि की तरह ही देश के विकास में सात बिंदुओं पर फोकस करने की बात कही थी। इसमें हर वर्ग का ख्याल रखना और हर तरह से देश के विकास का मुद्दा शामिल थी। सरकार ने उन सात बिंदुओं की जानकारी भी दी थी, जिसपर सबसे ज्यादा फोकस रखने की बात कही गई थी।
पिछले साल वित्त मत्री निर्मला सीतारमण ने बजट के सात आधार बताए थे। इन्हें 'सप्तऋषि' कहा गया था। ये 'सप्तऋषि' थे-
1. समावेशी विकास
2. वंचितों को वरीयता
3. बुनियादी ढांचे और निवेश
4. क्षमता विस्तार
5. हरित विकास
6. युवा शक्ति
7. वित्तीय क्षेत्र
वित्त मंत्री ने कहा था कि अमृत काल का विजन तकनीक संचालित और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है। इसके लिए सरकारी फंडिंग और वित्तीय क्षेत्र से मदद ली जाएगी। इस 'जनभागीदारी' के लिए 'सबका साथ, सबका प्रयास' अनिवार्य है।
वेद व अन्य हिंदू धार्मिक ग्रंथों में सात ऋषियों का जिक्र किया गया है। इनमें ऋषि कश्यप, अत्रि ऋषि, भारद्वाज ऋषि, ऋषि विश्वामित्र, ऋषि गौतम, जमदग्नि ऋषि, वशिष्ठ ऋषि शामिल हैं। इन्हें ही सप्तऋषि कहा गया है। सभी ऋषियों की अलग-अलग पहचान हैं।
ऋषि कश्यप
ऋषि कश्यप पहला स्थान माना गया है। पौराणिक कथाओं अनुसार जब गणेश जी ने अगलासुर का अंत करने के लिए उसे निगल लिया था, तब पेट की जलन को शांत करने के लिए ऋषि कश्यप ने ही दूर्वा की गांठे बनाकर दी थी, जिससे गणेश जी के पेट की जलन शांत हुई थी।
अत्रि ऋषि
भारद्वाज ऋषि
कहा जाता है कि ऋषि भारद्वाज ने महान ग्रंथों की रचना की थी। आयुर्वेद के ग्रंथ की रचना भी इन्होंने ही की थी। कौरवों और पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य भारद्वाज ऋषि के ही पुत्र थे।
ऋषि विश्वामित्र
ऋषि गौतम
ऋषि गौतम पांचवें ऋषि हैं। इनकी पत्नी अहिल्या थीं। गौतम ऋषि ने ही शाप देकर अहिल्या को पत्थर बना दिया था। भगवान राम के चरण स्पर्श से अहिल्या पुनः सही हो गई थीं।
जमदग्नि ऋषि
जमदग्नि को छठे ऋषि का स्थान दिया जाता है। परशुराम इन्हीं के पुत्र थे। कहा जाता है कि ऋषि जमदग्नि के कहने पर ही परशुराम ने अपनी माता रेणुका का सिर काट दिया था।
वशिष्ठ ऋषि
वशिष्ठ ऋषि को सातवां स्थान दिया जाता है। कहा जाता है कि वे राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के त्रेतायुग में गुरू थे।
इस बार के बजट में क्या हो सकता है खास?
एक फरवरी 2023 को पेश होने वाला बजट एक अंतरिम बजट है, इस कारण इस बजट में किसी बड़ी नीतिगत घोषणा की उम्मीद नहीं की जा रही है। हालांकि देश ने आने वाले दशक खुद को विकसित बनाने का लक्ष्य रखा है। पीएम मोदी कई बार सार्वजनिक मंच से कह चुके हैं कि यही समय है, सही समय है। ऐसे में देश की अर्थव्यवस्था को विकास की रफ्तार देने के लिए मोदी सरकार अपने भावी तैयारियों की झलक इस बार के बजट में दिखा सकती है। उम्मीद है कि सप्तऋषि की तर्ज पर ही इस बार भी कुछ नया वित्त मंत्री के अंतरिम बजट भाषण में सुनने को मिले।