अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में देश की ब्रांडेड कंपनियां अपने ग्राहकों को जीएसटी कटौती का लाभ नहीं दे रही हैं। कई ब्रांडेड कंपनियां ऐसी भी हैं, जो जीएसटी ये कंपनियां कटौती का लाभ ग्राहकों को देने में सुस्ती दिखाती हैं। लोकल सर्किल्स के एक सर्वे में इसका खुलासा हुआ है।
दरअसल, सरकार ने नवंबर, 2017 में शैम्पू, कॉस्मेटिक और ग्रॉसरी आदि वस्तुओं पर जीएसटी की दर को 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी किया था। इसके दो साल से अधिक समय बाद भी ब्रांडेड कंपनियां ग्राहकों को इसका लाभ नहीं दे रही हैं। सर्वे में शामिल महज 12 फीसदी लोगों ने माना कि उन्हें जीएसटी कटौती का पूरा लाभ मिला।
वहीं, 23 फीसदी लोगों ने माना कि कंपनियों ने कटौती का आंशिक फायदा दिया है, जबकि 47 फीसदी लोगों का मानना है कि उन्हें इसका कोई लाभ नहीं मिला है। इन लोगों का कहना है कि कंपनियों ने उत्पादों का आधार मूल्य बढ़ाकर इस कटौती का फायदा देने के बजाय अपना मुनाफा बढ़ा लिया है। वहीं, 18 फीसदी लोगों ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
रेस्टोरेंट्स में अब भी कट रही जेब
सर्वे में कहा गया है कि सरकार ने रेस्टोरेंट्स बिल पर जीएसटी की दर को 18 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दिया है। लेकिन ग्राहकों को इसका लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। सर्वे में शामिल केवल 13 फीसदी लोगों का मानना है कि रेस्टोरेंट्स बिल पर जीएसटी कटौती का उन्हें पूरा लाभ मिला। वहीं, 20 फीसदी लोगों को इसका आंशिक लाभ मिला, जबकि 39 फीसदी को इस कटौती का कोई लाभ नहीं मिल सका। 28 फीसदी लोगों ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
होम अप्लायंस पर भी नहीं मिल रहा लाभ
इस सर्वे में शामिल 37 फीसदी लोगों ने माना कि उन्होंने होम अप्लायंस और टेलीविजन खरीदने पर जीएसटी कटौती का लाभ नहीं मिला, जबकि 19 फीसदी को इसका आंशिक लाभ मिला। होम अप्लायंस और टेलीविजन पर 28 फीसदी के बदले अब 18 फीसदी जीएसटी लगता है। यह सर्वे देशभर के 220 जिलों के 15,000 से अधिक लोगों की ओर से मिले 40,000 से ज्यादा वोट पर आधारित है।
मुनाफाखोरी कर रही हैं कंपनियां
सरकार ने वस्तुओं और सेवाओं पर लगने वाले विभिन्न प्रकार के कर को खत्म कर ‘एक देश-एक कर’ की भावना से 2017 में जीएसटी लागू किया था। इसके लागू होने के बाद से अब तक जीएसटी परिषद कई उत्पादों और सेवाओं पर कर दी दरों में कमी कर चुकी है। सर्वे में कहा गया है कि उत्पादों और सेवाओं पर कर की दरों में की गई कटौती का मुख्य मकसद ग्राहकों के लिए खरीदारी को किफायती बनाना था। लेकिन कई ब्रांडेड कंपनियों ने जीएसटी दरों में कटौती का लाभ ग्राहकों तक नहीं पहुंचाया और खुद मुनाफाखोरी करने में जुट गईं।