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ब्लूमबर्ग: खाद्य वस्तुएं एक साल में 34 फीसदी महंगी, कंपनियों की कमाई दोगुनी

Wed, 28 Jul 2021 06:59 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

  • जलवायु परिवर्तन से दुनियाभर में मुश्किल हो रहा खाद्यान्न उत्पादन
  • 124.6 अंक रहा जून में खाद्य मूल्य सूचकांक, पिछले साल से 34 फीसदी ज्यादा
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
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विस्तार
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जलवायु परिवर्तन की वजह से दुनियाभर में खाने-पीने की वस्तुएं लगातार महंगी होती जा रही हैं। भविष्य में खाद्य महंगाई का खतरा और बढ़ रहा है। कीमतें लगातार बढ़ने से एफएमसीजी कंपनियों को 2021-22 में दोगुनी कमाई की उम्मीद है।

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ब्लूमबर्ग के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन का खाद्य मूल्य सूचकांक 12 महीनों से लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, जून में यह घटकर 124.6 अंक हो गया। इसके बावजूद एक साल पहले के मुकाबले 34% अधिक है। बदलते मौसम ने दुनियाभर में फसलों को प्रभावित किया है। चीन में खेतों में पानी भर गया। अमेरिका और कनाडा में गर्मी एवं सूखे से फसल बर्बाद हो गई। यूरोप में भारी बारिश की वजह से खेतों में पड़े अनाजों में फंगल रोगों का खतरा पैदा हो गया है।

17 फीसदी बढ़े कॉफी के दाम
जयवायु परिवर्तन के कारण ब्राजील में प्रमुख अरेबिका-कॉफी क्षेत्रों को तबाह करने वाली भयंकर ठंड पड़ रही, जो नई फसलों को बर्बाद कर देगी। इससे कॉफी के दाम इस सप्ताह 17 फीसदी तक बढ़ गए हैं। यह ठंड किसानों के लिए अधिक नुकसान पैदा कर सकती है और वर्षों तक उत्पादन प्रभावित हो सकता है। पश्चिमी कोलंबिया में लगी भयानक आग से निर्यात के लिए अनाज ले जाने वाली हजारों रेल कारें कई सप्ताह से बेकार पड़ी हैं। ये घटनाएं महंगाई बढ़ने की प्रमुख वजह हो सकती हैं।
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गरीब देशों को सबसे ज्यादा झटका
मौसम की अस्थिरता पर्याप्त भोजन का उत्पादन करना कठिन बना रही। इससे गरीब देशों को सबसे ज्यादा झटका लग रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा, जलवायु परिवर्तन के बुरे नतीजों का असर आने वाले समय में और भयानक हो सकता है।

एफएमसीजी क्षेत्र की कमाई 12 फीसदी बढ़ेगी, तीन साल में सबसे ज्यादा
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल का कहना है कि देश की एफएमसीजी (फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स) क्षेत्र की कमाई पिछले साल से दोगुना बढ़कर 2021-22 में 10-12 फीसदी रहने की उम्मीद है। यह वृद्धि पिछले तीन वित्त वर्ष में सबसे ज्यादा होगी। एजेंसी ने मंगलवार को कहा कि मूल्य आधारित वृद्धि और 2020-21 के कम आधार की वजह से कमाई में इजाफा होगा।

इसके साथ ही निकट भविष्य में  उत्पादों की मांग में भी सुधार की उम्मीद है। ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले शहरी बाजारों में मांग मामूली रूप से बढ़ेगी। यह अधिकांश बड़ी एफएमसीजी कंपनियों की ओर से पिछले वित्त वर्ष लगाए अनुमान के विपरीत है। क्रिसिल रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक अनुज सेठी ने कहा कि कच्चे माल की महंगाई से निपटने के लिए कंपनियों ने पिछले छह महीने में 4-5 फीसदी कीमतें बढ़ाई हैं।

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