दुनिया की सबसे बड़ी और लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी, बिटक्वाइन की कीमत में भारी गिरावट आई है। इसकी कीमत 45 हजार डॉलर तक पहुंच गई है। छह सितंबर को यह 51,000 डॉलर से ऊपर चली गई थी। सिर्फ बिटक्वाइन ही नहीं, दुनिया की अन्य क्रिप्टोकरेंसी जैसे इथेरियम, बाइनेंस क्वाइन, डॉजक्वाइन, आदि में भी गिरावट आई है। इससे क्रिप्टोकरेंसी के निवेशकों को नुकसान हुआ।
बिटक्वाइन की कीमत जून में 29,000 डॉलर पर आ गई थी, जो छह महीने का निचला स्तर था। अब यह इस स्तर से काफी चढ़ चुकी है। हालांकि बिटक्वाइन अभी भी अपनी रिकॉर्ड कीमत से काफी दूर है, जो लगभग 65000 डॉलर है। बिटक्वाइन ने अप्रैल में यह स्तर छुआ था। विशेषज्ञों का कहना है कि बिटक्वाइन की कीमत में आगे भी अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है।
भारतीय निवेशक सतर्क
भारत में क्रिप्टो के निवेशक सावधानी बरत रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि केंद्र सरकार जल्द ही क्रिप्टोकरेंसी पर बड़ा कदम उठा सकती है। सरकार इसे असेट या कमोडिटी की कैटेगरी में डाल सकती है। एक सूत्र ने कहा कि क्रिप्टो एसेट्स को उनकी तकनीक या एंड यूज के आधार पर परिभाषित किया जाएगा। फिलहाल सरकार के सामने यह दिक्कत है कि क्रिप्टोकरेंसी को क्या मानकर इस पर टैक्स लगाया जाए। इसे करेंसी, कमोडिटी या इक्विटी शेयर जैसा एसेट माना जाए या सर्विस।