कपड़ा क्षेत्र में उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना का लाभ उन्हीं कंपनियों को दिया जाएगा, जिनका पंजीकरण भारत में होगा। कपड़ा मंत्रालय ने मंगलवार को जारी नोटिफिकेशन में बताया कि कंपनियां अपनी विनिर्माण इकाइयों में प्रसंस्करण और परिचालन गतिविधियां भी चला सकती हैं।
वित्त मंत्रालय ने नोटिफिकेशन में बताया कि ट्रेडिंग और आउटसोर्स से की गई कमाई को कंपनियों के टर्नओवर में शामिल नहीं किया जाएगा और इस पर प्रोत्साहन का दावा भी नहीं कर सकेंगी। योजना के तहत पंजीकृत विनिर्माण इकाई के उत्पादन को ही प्रोत्साहन के योग्य माना जाएगा, जबकि उसी कंपनी की अन्य इकाई के उत्पादन को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा।
योजना का लाभ सिर्फ उन्हीं इकाइयों को मिलेगा, जो भारत में पंजीकृत हैं। जो कंपनियां निवेश और प्रदर्शन लक्ष्य को एक साल पहले ही पूरा करने का दम रखती हैं, उन्हें प्रोत्साहन का लाभ भी एक साल पहले ही मिलने लगेगा।
समूह की सिर्फ एक कंपनी ही शामिल
पीएलआई योजना के तहत किसी समूह की सिर्फ एक कंपनी को ही शामिल किया जाएगा। हालांकि, आवेदन के समय किसी समूह की एक से अधिक कंपनियों को शामिल किया जा सकता है, लेकिन अंतिम सूची तैयार होते समय समूह को किसी एक कंपनी का नाम ही प्रस्तावित करना होगा। योजना के तहत मानव निर्मित धागे वाले कपड़ों सहित तकनीकी वस्त्रों से जुडे 10 क्षेत्रों के उत्पादन को प्रोत्साहन देने की तैयारी है।
पीएलआई से तकनीकी ऑटो क्षेत्र में बढ़ेगा निवेश
ऑटो क्षेत्र के लिए जारी 25,938 करोड़ की पीएलआई योजना से कई स्तरों पर लाभ मिलेगा। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने बताया कि इससे घरेलू तकनीकी क्षेत्र और वाहन उपकरण कंपनियों में निवेश बढ़ने की काफी संभावना है। ई-वाहन का आधारभूत ढांचा तैयार करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। सरकार ने भी उम्मीद जताई है कि पीएलआई योजना से ऑटो क्षेत्र में 42,500 करोड़ का निवेश आएगा, जिससे उत्पादन में 2.30 लाख करोड़ की वृद्धि होगी। यह क्षेत्र अगले पांच साल में 7 लाख से ज्यादा नए रोजगार पैदा करेगा।