म्यूचुअल फंड सलाहकारों की सलाह है कि फिलहाल निवेशकों को इस पर कोई फैसला नहीं लेना चाहिए। क्योंकि कई फंड मैनेजर इन स्कीमों का प्रबंधन करते हैं, ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है। एक्सिस फंड को 2009 में शुरू किया गया। उस समय इसकी प्रमुख टीम में एमडी चंद्रेश निगम और विरेश जोशी थे।
देश के सातवें सबसे बड़े फंड हाउस एक्सिस म्यूचुअल फंड में इनसाइडर ट्रेडिंग (फ्रंट रनिंग) का मामला सामने के आने के बाद दो फंड मैनेजरों विरेश जोशी और दीपक अग्रवाल को छुट्टी पर भेज दिया गया है। बाजार नियामक सेबी ने भी मामले में जांच शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक, विरेश इस फंड हाउस की सात इक्विटी स्कीमों का प्रबंधन करते थे, जबकि अग्रवाल इक्विटी रिसर्च और फंड मैनेजर थे।
विज्ञापन
उनको भी 3 फंड के प्रबंधन से निकाल दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों के खिलाफ शिकायतें मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है। एक्सिस म्यूचुअल फंड फरवरी, 2022 से दोनों फंड मैनेजरों की जांच कर रहा था। इसने आंतरिक सलाहकार की सेवा ली। फंड हाउस ने कहा कि हम नियामकीय जरूरतों के आधार पर कार्रवाई करेंगे।
अवैध है फ्रंट रनिंग
जिन सात स्कीमों को ये फंड मैनेजर मैनेज करते थे, उसमें एक्सिस कंजम्प्शन ईटीएफ, एक्सिस बैंकिंग ईटीएफ, निफ्टी ईटीएफ, आर्बिट्रेज फंड, क्वांट फंड, टेक्नोलॉजी फंड ईटीएफ और वैल्यू फंड था। फ्रंट रनिंग का मतलब यह होता है, जब कोई फंड मैनेजर किसी खास जानकारी के आधार पर बड़े पैमाने पर शेयरों की खरीदी या बिक्री करे और इससे वह फायदा कमाए। इस तरह की गतिविधियां भारत में अवैध मानी जाती हैं।
विज्ञापन
निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं
म्यूचुअल फंड सलाहकारों की सलाह है कि फिलहाल निवेशकों को इस पर कोई फैसला नहीं लेना चाहिए। क्योंकि कई फंड मैनेजर इन स्कीमों का प्रबंधन करते हैं, ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है। एक्सिस फंड को 2009 में शुरू किया गया। उस समय इसकी प्रमुख टीम में एमडी चंद्रेश निगम और विरेश जोशी थे। इस समय इसका असेट अंडर मैनेजमेंट 2.59 लाख करोड़ रुपये है।