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कोरोना और महंगाई की मार: फीका रह सकता है रंगों का त्योहार, खाद्य तेलों के दाम 52 फीसदी तक बढ़े

Tue, 23 Mar 2021 07:13 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • कोरोना संक्रमण से बचने के लिए समूह में होली मनाने को लेकर जारी हो सकता है प्रतिबंध,
  • महंगाई के कारण खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी फीका किया होली का रंग
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थोक महंगाई - फोटो : Amar Ujala (File Photo)
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विस्तार
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होली का त्योहार करीब आ गया है। लेकिन पिछले साल की तरह इस साल भी होली के रंग में भंग पड़ने के आसार लग रहे हैं। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों ने सरकारों को सचेत कर दिया है और अलग-अलग राज्यों में अभी से भीड़-भाड़ में होली न मनाने को लेकर निर्देश जारी किये जा चुके हैं, तो देश की राजधानी दिल्ली में भी कुछ इसी तरह के आसार बन रहे हैं।

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कोरोना से अलग महंगाई ने भी होली का रंग बेरंग करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी है। पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों के कारण खुदरा सामान की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी बनी हुई है। इससे इस साल भी होली का रंग कुछ फीका रह सकता है।     

खाद्य तेलों में आई रिकॉर्ड तोड़ महंगाई

पिछले चार महीनों के बीच खाद्य तेल की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। इसमें सरसों के तेल से लेकर पाम ऑयल, सूरजमुखी, नारियल, मूंगफली और अन्य तेल भी शामिल हैं। वर्तमान में सरसों के तेल की कीमत 120 रुपये प्रति लीटर से 140 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं। जो रिफाइंड ऑयल नवंबर में 95 रुपये प्रति लीटर हुआ करता था, उसकी कीमत आज 140 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। सरसों के तेल की कीमतों में लगभग 40 फीसदी, सूरजमुखी के तेल में 52 फीसदी, सोयाबीन के तेल में 34 फीसदी और रिफाइंड तेल की कीमतों में 37 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है।

कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे देश में इनकी कमजोर फसल का होना और खाद्य तेलों की लगातार विदेश आयात पर निर्भरता बढ़ने को बताया गया है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों का असर सीधे खाद्य तेलों पर भी बढ़ रहा है क्योंकि इसके कारण खाद्य तेलों का आयात महंगा हुआ है। अनुमान है कि नई फसल के आने तक यानी मई-जून तक तक कीमतों में यह बढ़ोतरी बने रहने के अनुमान हैं।

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खाद्य तेल की कीमतों में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। बाज़ार विशेषज्ञों के मुताबिक खाद्य वस्तुओं की खुदरा कीमतें थोक कीमतों से 20 से 30 फीसदी अधिक रहती हैं। इस प्रकार खाद्य तेलों की कीमतों में भी इसी क्रम में महंगाई बढ़ना तय है।  

तेल की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने नवंबर में खाद्य तेलों, विशेषकर पाम ऑयल के आयात पर 10 फीसदी की इंपोर्ट ड्यूटी भी घटा दी थी, लेकिन पेट्रोल कीमतों के लगातार इजाफे ने इस कदम को भी बेअसर साबित कर दिया और कीमतों में बढ़ोतरी लगातार जारी रही।

सब्जियों की कीमतों में भी बढ़ोतरी

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों का असर प्रमुख सब्जियों की कीमतों पर भी पड़ा है। सफल बाजार में आलू की कीमत इसी समय 30 रुपये किलो तक पहुंच गई है, हालांकि खुदरा बाजार में यह 10 से 15 रुपये किलो में उपलब्ध है। प्याज की नई फसल आने का समय करीब आने के बाद भी प्याज की खुदरा कीमत आज भी 40 से 60 रुपये के बीच चल रही है।

मटर 40 रुपये प्रति किलो, लौकी 30 रुपये किलो, गाजर 20 से 30 रुपये, टमाटर की कीमतें 30 से 40 रुपये के बीच चल रही हैं। बैगन 40 रुपये किलो, मूली 30 रुपये किलो, सीताफल 30 रुपये किलो, बीन्स 80 रुपये किलो में बिक रही है। इस तरह सब्जियों की महंगाई होली का जायका बिगाड़ सकती है।

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