मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस जियो इंफोकॉम लिमिटेड (RJIL) ने भारती एयरटेल के साथ तीन सर्किलों में 800 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के 'इस्तेमाल का अधिकार' समझौता पूरा कर लिया है। इस संदर्भ में एयरटेल ने बताया कि उसे कर भुगतान के बाद प्रस्तावित हस्तांतरण के लिए जियो से 1,004.8 करोड़ रुपये हासिल हुए हैं। इतना ही नहीं, कंपनी ने यह भी बताया कि जियो स्पेक्ट्रम से संबंधित 469.3 करोड़ रुपये की भविष्य की देनदारियों का भी दायित्व लेगी।
पहले से बेहतर होगा बुनियादी ढ़ांचा और नेटवर्क क्षमता
इसके तहत रिलायंस जियो 800 मेगाहर्ट्ज बैंड में आंध्र प्रदेश में 3.75, दिल्ली में 1.25 और मुंबई में 2.50 मेगाहर्ट्ज अतिरिक्त स्पेक्ट्रम का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवाएं दे सकेगा। उम्मीद की जा रही है कि नए स्पेक्ट्रम के जुड़ने के साथ ही रिलायंस जियो का बुनियादी ढ़ांचा और नेटवर्क क्षमता पहले से बेहतर होगा।
दो बड़ी दूरसंचार कंपनियों के बीच इस तरह का पहला समझौता
मालूम हो कि जियो की एयरटेल के इस समझौते की घोषणा अप्रैल 2021 में हुई थी। यह किसी दो बड़ी दूरसंचार कंपनियों के बीच इस तरह का पहला समझौता था। इसी साल की शुरुआत में स्पेक्ट्रम नीलामी हुई थी, जिसमें 855.6 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के लिए 77,800 करोड़ रुपये से ज्यादा की बोलियां लगी थी।
नीलामी में मुकेश अंबानी ने लगाए थे सबसे ज्यादा पैसे
मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो ने नीलामी में सबसे ज्यादा पैसे लगाए थे। जियो ने 800 मेगाहर्ट्ज, 1800 मेगाहर्ट्ज और 2300 मेगाहर्ट्ज जैसे बैंड में 488.35 मेगाहर्ट्ज को 57,122.65 करोड़ रुपये में खरीदा था। भारती एयरटेल की बात करें, तो इस नीलामी में कंपनी ने इस्तेमाल करने के अधिकार को 18,700 करोड़ रुपये में जीता था। संकट में फंसी वोडाफोन-आइडिया के लिए नीलामी में खरीदे गए स्पेक्ट्रम का मूल्य 1,993.4 करोड़ रुपये था। कुल स्पेक्ट्रम में से 700 मेगाहर्ट्ज बैंड के स्पेक्ट्रम का हिस्सा एक-तिहाई था। 2016 की नीलामी में यह स्पेक्ट्रम बिल्कुल नहीं बिका था।