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बंटवारे के बाद भी पाकिस्तान में चलता था भारतीय रुपया, आरबीआई गवर्नर के होते थे हस्ताक्षर

Sat, 11 Aug 2018 01:16 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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rbi pakistan
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भारत और पाकिस्तान को आजाद हुए इस बार 71 साल पूरे हो जाएंगें और दोनों देश अपना 72वां स्वाधीनता दिवस मनाएंगे। दोनों देश कभी एक थे, लेकिन धर्म के आधार पर हुए इस बंटवारे के बाद भी कई ऐसी चीजें हैं जिनमें पर भारतीयों को गर्व होना चाहिए। इनमें से एक पाकिस्तान का रुपया भी है। 
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भारत में छपते थे पाकिस्तानी नोट

15 अगस्त 1947 को आजादी मिलने के बाद मार्च 1948 तक केवल भारतीय नोट ही पाकिस्तान में चलते थे । 1 अप्रैल 1948 से पाकिस्तान में भारत में चल रहे सभी तरह के नोटों के सर्कुलेशन को बंद कर दिया। इसके स्थान पर भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक ने 1 अप्रैल 1948 से पाकिस्तान सरकार के लिए नोट छापना शुरू किया। इन नोटों का प्रयोग केवल पाकिस्तान में ही हो सकता था। 

आरबीआई गवर्नर के होते थे साइन

पाकिस्तान के लिए तैयार किए यह नोट नासिक स्थित सिक्युरिटी प्रेस में छपते थे। नोट पर आरबीआई के गवर्नर के ही साइन होते थे। नोट पर अंग्रेजी व उर्दू में गवर्नमेंट ऑफ पाकिस्तान और हुकूमत-ए-पाकिस्तान लिखा होता था। 
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इन नोटों की होती थी छपाई

तब आरबीआई 1,5,10 और 100 रुपये के पाकिस्तानी नोट छापता था। पाकिस्तान की सरकार 1953 से लेकर के 1980 तक एक रुपये का नोट खुद ही जारी करता रहा। 
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1953 तक चले भारत में छपे नोट

पाकिस्तान में 1953 तक भारत से ही करेंसी नोट छपकर आते रहे। इसी साल पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) ने देश में खुद नोट छापना शुरू किया था। 

भारत पर है पाकिस्तान का कर्ज

एसबीपी के अनुसार भारत सरकार और आरबीआई ने आजादी मिलने के 66 सालों बाद भी उसका कर्ज अदा नहीं किया है। 1947 में आरबीआई को पाकिस्तान की नई सरकार को 55 करोड़ रुपये देने थे, जो आज तक नहीं दिए गए हैं। अब एसबीपी के अनुसार यह कर्जा बढ़कर के 5.6 बिलियन रुपये के करीब पहुंच गया है। 

अब है दोगुना अंतर

अगर पाकिस्तानी और भारतीय रुपये की डॉलर से तुलना करें तो इसमें जमीन-आसमान का अंतर है। डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपया आज की तारीख में 130 के स्तर पर है। वहीं भारतीय रुपया 68 के स्तर पर है। यह साफ बताता है कि भारत की अर्थव्यवस्था कितनी मजबूत स्थिति में है। 
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