गलत अकाउंटिंग और माइक्रोफाइनेंस में धोखाधड़ी ने इंडसइंड बैंक को 20 साल बाद घाटे में धकेल दिया है। बैंक को वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही में 2,329 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ है। इसकी प्रमुख वजह धोखाधड़ी के लिए अधिक प्रावधान है।
डेरिवेटिव ट्रेड में गलत अकाउंटिंग और माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो में धोखाधड़ी का बड़ा असर इंडसइंड बैंक के मुनाफे पर देखने को मिला है। बैंक को वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही में 2,329 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ है। इसकी प्रमुख वजह धोखाधड़ी के लिए अधिक प्रावधान है।
20 साल बाद बैंक को हुआ घाटा
इंडसइंड बैंक को करीब 20 साल बाद पहली बार किसी तिमाही में घाटा हुआ है। इससे पहले 2006-07 की चौथी तिमाही में बैंक को घाटा हुआ था। 2023-24 की चौथी तिमाही में उसे 2,349 करोड़ का मुनाफा हुआ था। बैंक ने चौथी तिमाही के दौरान 2,522 करोड़ का प्रावधान किया है, जो एक साल पहले के 950 करोड़ रुपये के प्रावधान से अधिक है। बैंक की ब्याज आय में 13 फीसदी की गिरावट रही। पूरे वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान बैंक का शुद्ध लाभ 71 फीसदी घटकर 2,576 करोड़ रह गया।
बोर्ड को धोखाधड़ी में कुछ कर्मियों पर संदेह
इंडसइंड बैंक के बोर्ड ने धोखाधड़ी में लेखांकन एवं वित्तीय रिपोर्टिंग के कुछ कर्मचारियों के शामिल होने का संदेह जताया है। साथ ही, प्रबंधन को मामले की जानकारी जांच एजेंसियों और नियामक प्राधिकरणों को देने का निर्देश दिया है।