आने वाले दिनों में बैंकों में नकदी की दिक्कत बढ़ सकती है। कर्ज के मुकाबले जमा वृद्धि में गिरावट देखी गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से बैंकिंग प्रणाली में पैसा डालने से सितंबर तक समस्या नहीं होगी। एक रिपोर्ट के मुताबिक जमा और कर्ज के बीच 50 लाख करोड़ रुपये तक का अंतर है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से ब्याज दरों में दो बार में 0.50 फीसदी की कटौती के बाद बैंकों को जमा के मोर्चे पर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। बैंकों के 2024-25 के वित्तीय नतीजों के मुताबिक, उधारी की तुलना में जमा में भारी गिरावट आई है। इस समय बैंकों में भरपूर नकदी है, इसलिए इस कमी से कोई समस्या नहीं है, लेकिन आगे बैंकों को नकदी की दिक्कत आ सकती है।
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जमा और उधारी के बीच का अंतर
आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि जमा और कर्ज के बीच अंतर 45-50 लाख करोड़ रुपये पर लंबे समय से स्थिर है। 18 अप्रैल को समाप्त पखवाड़े में कुल जमा 228.60 लाख करोड़ और उधारी 181.86 लाख करोड़ थी। 4 अप्रैल को यह क्रमश: 231.14 लाख करोड़ और 184 लाख करोड़, जबकि 21 मार्च के पखवाड़े में जमा 225.74 लाख करोड़ और उधारी 182.43 लाख करोड़ थी।
RBI ने दिसंबर से अब तक बैंकों में कितने करोड़ डाले
24 जनवरी के पखवाड़े में जमा 221.28 लाख करोड़ और उधारी 178.74 लाख करोड़, 10 जनवरी को जमा 221.50 लाख करोड़ और उधारी 178 लाख करोड़ थी। 27 दिसंबर, 2024 के पखवाड़े में जमा 220.63 लाख करोड़ और उधारी 177.42 लाख करोड़ थी। केंद्रीय बैंक ने दिसंबर से अब तक बैंकों में 8.57 लाख करोड़ डाले हैं।