कोरोना के चलते संकट से जूझ रहे सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) को केंद्र सरकार ने बड़ी राहत दी है। अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकने के लिए और विकास की मुख्यधारा को गति देने के लिए एमएसएमई को 15,700 करोड़ रुपये दिए गए।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविंद्र नाथ टैगोर की बात को याद करते हुए कहा, इतिहास में यह क्षण नए युग की सुबह है, जहां भारत भरोसा और उम्मीद की धरती बनने के लिए तैयार है। इसके अलावा बजट में छोटी कंपनियों की परिभाषा बदलने का भी ऐलान किया गया। यह परिभाषा कंपनियों की पूंजी के आधार पर बदली जाएगी। 50 लाख की मौजूदा सीमा से पूंजीगत आधार को बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये करके छोटी कंपनियों की परिभाषा को बदला जाएगा।
अभी करोड़पति टर्नओवर वाली कंपनियों को छोटी कंपनियों में गिना जाएगा इससे 2 लाख कंपनियों को फायदा हुआ। वहीं सीतारमण ने कहा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग को जोड़ दिया जाएगा। साथ ही छोटी कंपनियों के लिए पेडअप कैपिटल सीमा बढ़ाई जाएगी।
यह है पेडअप शेयर कैपिटल वह राशि है जिसके लिए शेयरधारकों को शेयर जारी किए जाते हैं और भुगतान शेयरधारकों द्वारा किया जाता है। यह राशि वास्तविक फंड है जो कंपनी शेयरों के मुद्दे पर प्राप्त करती है। यह राशियां आरंभिक सार्वजनिक पेशकश के रूप में क्रेडिट गारंटी स्कीम 31 मार्च, 2021 कर दी गई हैं। स्कीम के तहत 3 लाख करोड़ में से अब तक 2.01 लाख करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं।
5 करोड़ नौकरियां पैदा करने का रखा है लक्ष्य
केंद्र सरकार का लक्ष्य आर्थिक विकास में एमएसएमई योगदान को 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत पहुंचाना है। एमएसएमई की निर्यात में भागीदारी भी 48 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत तक पहुंचानी है। इस क्षेत्र में 5 करोड़ नौकरियां पैदा करने का लक्ष्य भी है।
स्टार्टअप को मिला टैक्स होलीडे
महामारी से उबरने के लिए स्टार्टअप के लिए की गई घोषित रियायतों को एक साल के लिए बढ़ा दिया गया है। स्टार्टअप को मार्च 2022 तक विभिन्न प्रकार की रियायतें मिलेंगी। कैपिटल में छूट भी 1 साल के लिए बढ़ा दी गई है।
आर्थिक सर्वे के मुताबिक, देश में इस समय 41000 से ज्यादा स्टार्टअप हैं और इनमें 4.7 लाख से ज्यादा को रोजगार मिल रहा है। कोरोना संक्रमण के कारण स्टार्टअप भी प्रभावित हुए हैं। इनकी ओर से करों में रियायत स्टार्टअप स्थापित करने की प्रक्रिया के सरलीकरण की मांग भी की जा रही है।
अधिकतर स्टार्टअप नवाचार और तकनीकी क्षेत्र में उभर कर सामने आया। करीब 38 यूनिकार्न (निजी क्षेत्र में स्थापित स्टार्टअप कंपनी) इस समय देश में हैं। स्थापित हो रहे स्टार्टअप के लिहाज से भारत विश्व का तीसरा बड़ा देश है।