सरकार ने बजट में करदाताओं को सीधे तौर पर कोई राहत नहीं दी है लेकिन कोविड 19 महामारी के भारी दबाव में नया कर भी नहीं वसूला। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा था कि इस बजट में कोविड सेस लगाया जा सकता है क्योंकि 2020 में राहत के तौर पर पहले ही 29 लाख करोड़ की घोषणाएं हो चुकी हैं।
इससे एक तरफ तो सरकार पर खर्च और कर्ज बढ़ता जा रहा है, तो दुसरी ओर राजस्व वसूली में बड़ी गिरावट भी आई। इन परिस्थितियों को देखा जाए तो नया कर या सेस नहीं वसूला जाना ही करदाताओं के लिए किसी राहत से कम नहीं है।
कमियां तो हर बजट में होती हैं लेकिन इस बार का बजट पूरी तरह अर्थव्यवस्था को मजबूती और विकास दर बढ़ाने वाले है। कृषि क्षेत्र के लिए 16.5 लाख करोड़ का प्रावधान किए जाने के बावजूद सरकार ने आमजन से वलूली नहीं की है।
इतना नहीं नई शिक्षा, बुनियादी ढांचा और स्वास्थ्य क्षेत्र पर भी बड़े खर्च की घोषणा हुई है। बावजूद इसके सरकार इस खर्च को कर्जदाताओं से वसूलने के बजाय कर्ज के जरिए पूरा करने की तैयारी में है।
सरकर का पूरा जोर खर्च और खपत बढ़ाने पर है। अगर लोगों को टैक्स बचत के ज्यादा मौके नहीं मिलेंगे तो जाहिर है पैसा बाजार में आएगा और खपत बढ़ेगी।
उत्पादों की मांग में इजाफा होने से कंपनियां उत्पादन भी बढ़ाएंगी, जो रोजगार सृजन का आधार बनेगा। इस तरह देखा जाए तो घूम फिरकर बात अर्थव्यवस्था की मजबूती और विकास दर बढ़ाने पर ही आ जाएगी।